शीर्षक पंक्ति:आदरणीय शांतनु सान्याल जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
शनिवारीय अंक में पढ़िए ब्लॉगर डॉट कॉम पर प्रकाशित रचनाएँ-
सब जग का जिसे कारण पाऊं
मैं
आई
शरण
विनायक
रखना लाज
ओ पालनहारे
निर्गुण और न्यारे
तुम्हीं हो विघ्न हर्ता
जगत के स्वामी
हो अन्तर्यामी
सारी पीड़ा
भक्तों की
हर
लो
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*****“बरसात की खामोशी”कहीं छतों की टप-टप,
तो कहीं गलियों का सन्नाटा।
भीगी हुई मिट्टी की खुशबू में,
कुछ कहानियाँ दबी हुई हैं।
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