सादर अभिवादन
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निवेदन।
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सोमवार, 11 अगस्त 2025
4477 ..एक बेचैन शब्द का सफर, चल से चुल तक
शनिवार, 3 मई 2025
4477...अब मिर्ची कम तीखी चाहिए...
शीर्षक पंक्ति: आदरणीया शुभा मेहता जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
पढ़िए पाँच पसंदीदा रचनाएँ-
अब देखो न...
प्रकृति प्रदत्त चीजें ,
जो मिली हैं उपहार स्वरूप
अलग-अलग गुणधर्म लिए
अब मिर्ची कम तीखी चाहिए
मीठे फलों में नमक मिर्च लगाएंगे
बेचारे करेले को तो नमक लगाकर कर
इस कदर निचोड लेते है
कि बेचारा आठ-आठ आँसू रो लेता है
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शायरी | लोग बदले हैं | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
लोग बदले हैं मौसमों की तरह।
औ' हम करते रहे ख़ुद से ज़िरह।
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किसे सुनाएँ इस दुनिया में
हम दर्द अपना कोई भी नहीं
इस जहां में हमदर्द अपना
गिरता है जहाँ पसीना अपना
पहन मुखौटे नेता यहां पर
सियासत करने आ जाते हैं
हमारे पेट की अग्नि पर
रोटियाँ अपनी सेकते हैं
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