सादर अभिवादन
मजबूर है तू भी
आदत से अपनी
अच्छी बातों में भी
तुझे छेद हजारों
नजर आ जायेंगे
रचनाएँ कुछ मिली जुली ....
जेठ की तपती दोपहर में
बादलों का आना ही
राहत और सुकून देता है
और उनका बरस जाना
ज्यों तन-मन को भिगोता देता है
तुम आना तो वैसे ही आना
रूह में बस जाने को आना
अल्फाजों के मेरे छुआ लबों ने
जब तेरे मिल गये सब धाम l
अंतस फासले सिरहाने पाकीजा
अंकुश सिमट गये सब ध्यान ll
युग युगांतर साधना महकी जिस
सुन्दर क्षितिज सागर समर समाय l
नव यौवन लावण्य अंकुरन उदय
जैसे इनके रूहों बीच समाय ll
तन-मन झुलसाकर ख़ाक करती गर्मियों में
बादलों की अठखेलियाँ गिनते है
फूल काँटों संग झूमते हैं
भँवरे तितलियों संग ताल मिलाते हैं
गेहूँ और धान की बालियों से
हरे-भरे लहलहाते खेत
गाते किसान,
निष्पक्ष और सख़्त आलोचक
पत्नी जैसा हो
आपके साथ हो
तो निस्संदेह
कविता नज़र आयेगी
आना जाना,रस्म रिवाज रोज रोज की
रिवायतें औ बहाने सरेआम....बस करों,
मलंग मन,कस्तूरी सांसों मे घुल रही
जाते-जाते आँखों के इशारे..बस करों।
यूं तो हिंदी साहित्य में कविता लिखने वाले अनगिनत सितारे रहे हैं जिनकी कलम ने हर दौर में हिंदी को एक से बढ़कर एक बेहतरीन रचनाएं दीं। कविता हिंदी साहित्य की वो विधा है जो खूबसूरत से खूबसूरत विचार को कम शब्दों में कहना जानती है। 'गांव कनेक्शन' की साथी अनुलता राज नायर ने कोशिश की है ऐसी ही 10 बेहतरीन शख्सियतों को याद करने की, जिनकी कविताओं को साहित्य संसार सदियों तक याद रखेगा।
विदाई की बेला है
दुख तो स्वाभाविक है
नम होंगे नयन
जार-जार अश्रु भी बहेंगे
पर याद रखना होगा
हर अंत एक नयी शुरुआत है
हर रात का होता प्रभात है !
आज बस
कल मिलिएगा सखी से
सादर वंदन






