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सोमवार, 22 जनवरी 2024

4013 ..जीत हो गयी सत्य की, झूठ गया है हार

सादर अभिवादन

आज  राज्याभिषेक
पूरे दरबार के साथ


आज मिली - जुली रचनाएं देखिए


धोबी का लड़का रोज पूछता है,
कपड़े हैं क्या प्रैस करने के लिए।

कपड़े भी ऐसे हैं कि फटते ही नहीं,
दर्जी भी पूछे, हैं क्या सीने के लिए।




काश्तकार था यह इजहार
इश्तहार इस अजूबी दस्तकार का l

पढ़ समझ ना सका धुन्ध बूँद
लिपटी धुन इस कलमाकार का ll




राम ने कहा
सुनो वत्स मुझे
मर्यादा पुरुषोत्तम जानते है
सब मुझे
मर्यादा में ही रहने दो
वाल्मीकि और तुलसी की
भावनाओं के साथ ही
मुझे जन जन के जीवन में बहने दो


"तेरे मन में राम, तन में राम,
तेरे मन में राम, तन में राम, रोम रोम में राम रे
राम सुमीर ले, ध्यान लगा ले, छोड़ जगत के काम रे
बोलो राम राम राम, बोलो राम राम राम
बोलो राम राम राम, बोलो राम राम राम .. "






राम शताधिक वर्ष से,
घर को थे मुहताज।
अब आये निज सदन में,
रामलला-रघुराज।।

जीत हो गयी सत्य की,
झूठ गया है हार।
राम नाम की विश्व में,
होती जय-जयकार।।




आज बस
कल सखी आ सकती है
सादर
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