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शनिवार, 5 अगस्त 2023

3840....व्याख्यात्मक

हाज़िर हूँ...! पुनः उपस्थिति दर्ज हो...   

पद्मश्री डॉ. उषाकिरण खान कहती हैं :- यह योजनाबद्ध कार्य है! मुझे लगता है कुछ लोगों के जीवन में साहित्य होता है कुछ साहित्य के माध्यम से जीवन को मोड़ देते हैं।

विवरणात्मक

वैज्ञानिक उन समस्याओं का समाधान ढूंढते हैं, जो हमारे समाज को प्रभावित करते हैं। इन समस्याओं में जैविक असंतुलन, जलविकार, जनसंख्या वृद्धि और वातावरण वृद्धि शामिल है। बहुत सारी समस्याओं का हल ढूंढने के लिए वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग किया जाता है, जैसे कंप्यूटर मॉडलिंग, प्रयोगशालाओं में प्रयोग आदि।

व्याख्यात्मक

प्रत्येक व्यक्ति को शायद, काम पर अवसर आए जब मैं एक व्याख्यात्मक टिप्पणी लिखने के लिए किया था। पहली नज़र में, ऐसा लगता है कि सब कुछ आसान है, लेकिन आप इसे लिखने के लिए है, यह अपने विचारों को इकट्ठा करने के लिए और समस्या का प्रबंधन करने के लिए लाने के लिए मुश्किल है। तो, इस लेख में की कैसे इस तरह के एक दस्तावेज तैयार करने और व्याख्यात्मक ज्ञापन का एक उदाहरण को देखने के लिए के बारे में बात करते हैं।

व्याख्यात्मक

उपकरण स्रोत पाठ से किसी भी अप्रासंगिक और अनावश्यक शब्दों या वाक्यांशों को हटाकर सामग्री को फिर से लिखता है जो स्रोत पाठ के संक्षिप्त संस्करण को संक्षिप्त रूप देता है।

यह देखते हुए कि उपकरण ऐसे शब्दों को कैसे प्रतिस्थापित करता है, न केवल छात्रों को स्पष्ट रूप से और सरलता से लिखने में मदद कर सकता है बल्कि एक ही शब्द के लिए अलग-अलग शब्द दिखाकर उनकी शब्दावली को भी बढ़ा सकता है।

व्याख्यात्मक

संगठन का आंतरिक दस्तावेजजो कुछ क्रियाओं या घटनाओं की व्याख्या करता है।इस दस्तावेज़ के लिए कोई एकीकृत रूप नहीं है, लेकिन मैनुअल, यदि वांछित हो, इसे मंजूरी दे सकते हैं... संगठन के एक कर्मचारी द्वारा एक खाली ए4 शीट पर एक प्रति में एक व्याख्यात्मक नोट लिखा जाता है। इसमें जानकारी है कि कौन किससे बात कर रहा है, साथ ही स्थिति की व्याख्या भी करता है। एक नोट हाथ से या एक मुद्रित तकनीक का उपयोग करके लिखा जा सकता है।

रचनात्मक

लेखन संकेत एक ऐसा आईडिया है, जो आपकी कल्पना को प्रेरित करने में मदद करता है। इसे एक छोटे असाइनमेंट के रूप में समझें, जो आलोचनात्मक सोच के बजाय मौलिकता और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करता है। लेखन संकेतों से आपको इसका एक आईडिया मिलता है कि आपको तुरंत किस चीज़ के बारे में लिखना है, इस तरह आपको अलग से कोई आईडिया सोचने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

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पुनः भेंट होगी...
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शनिवार, 29 जुलाई 2023

3833... लघुकथा

लघुकथा में जो कहना हो वह या तो पात्र कहें या फिर परिस्थितियाँ। किन्तु जब इन्हें पीछे धकेल कर लेखक स्वयं व्याख्यान देने लगे तो उसे रचना में लेखक का अनाधिकृत प्रवेश माना जाता है। लघुकथा के अंत में चौंका देने वाली स्थिति आने के बाद लघुकथा का विस्तार करना लेखकीय प्रवेश है।

लघुकथा : विजेन्द्र जेमनी

“सर , कुछ लोग जो बहुत निराशा से घिरे थे , उनकी सफलता के सारे रास्ते बंद हो गये थे , मैं फिर भी उन्हें आशा की सीढ़ियाँ चढाती रही परिणाम वे गिर गये और जो चोट लगी उससे वे कभी नहीं उभरे | सो उनके परिजन ने मुझे बहुत अपमानित कर निकाल दिया |”

 हाज़िर हूँ...! पुनः उपस्थिति दर्ज हो...

बढ़ती आबादी पर कौन विचार करे... 

शीर्षक पर भी तो श्रम नहीं होता

लघुकथा : पूनम कतरियार

अब वहाँ कौन मेरे स्वागत को तैयार है? मुझे कौन बुलाता है? ये गारे-सीमेंट के स्पन्दनहीन अट्टालिकाएँ मुझे क्या पहचानेंगी? मेरे शीशम- देवदार, पीपल-बरगद जैसे कद्दावर वृक्ष, फल-सब्जियों के सारे द्रुम इन कंक्रीट के जंगलों की सड़कों और इमारतों ने खा लिया है। मेरे लिए कोई बाँह फैलाए है भला, बता जरा?

लघुकथा

बयालिस (42) साल में क्या बदला...

लघुकथा : डॉ. ऋषभदेव शर्मा

सुना जाता है, उसी दिन से दोनों पक्ष अख़बार और संविधान पढ़ पढ़ कर लड़ रहे हैं। नेता-वेशधारी भगवान विष्णु शेष शय्या छोड़कर आनंद से कुर्सी पर सोए हुए हैं। लोग कहते हैं, युग बदल रहा है। (1.12.1981)

लघुकथा : डॉ. चन्द्रेश छतलानी

जिस तरह (आरम्भ) और (प्रारम्भ) शब्द दोनों एक से दीखते हैं मगर दोनों में अंतर है वे कभी एक नहीं कहे जा सकते। ठीक उसी प्रकार कथा और लघुकथा कभी एक नहीं हो सकतीं, दोनों विधाओं की कसौटी अलग है।

लघुकथा : कृष्णलता यादव

वैसे तो लेखिका ने लगभग सभी विषयों पर लेखनी चलाई है लेकिन कुछ विषयों पर बहुत कम लिखा है जैसे पंडे-पुजारियों के आचरण पर, आत्मविश्वास, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ। कुछ विषय लेखिका की नजरों से छूट गये


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पुनः भेंट होगी...
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