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मंगलवार, 3 नवंबर 2020

1934...अब आसान कहाँ होता है दुश्मन की नज़र में रहना...

सादर अभिवादन।

 

अब आसान कहाँ होता है 

दुश्मन की नज़र में रहना, 

हाँ, इससे आसान होता है 

ताज़ा ख़बर में बने रहना।

#रवीन्द्र_सिंह_यादव  

आइए पढ़ते हैं आज की चंद पसंदीदा रचनाएँ-

एक ऐसा गीत.... कुसुम कोठारी


जिन होठों से गीत हैं छूटे

उन पर तान सजा दू़

जिन आँखों से सपने रुठे

सपने सरस सजा दूँ।

कोई ऐसा गीत सुना दूँ

भूल जाते हो तुम..... सुधा सिंह 'व्याघ्र'

मेरी फ़ोटो

जब तक तुम्हारा चित्त

यह गवाही देने लगे

कि तुमने मेरे जीवन में मेरे

साथी के रूप में प्रवेश किया है

और तुम्हें अपने कर्तव्यों का पालन

अब शुरू कर देना चाहिए

कड़वी जिंदगी का टॉनिक !!!.... सदा


ये सुधियाँ भी

हुई बावरी देखो

चंचल मन।

किस #मोड़ पर #मिलेंगे वो... दीपक कुमार भानरे

 

मोड़ नहीं सकते कदमों को ,

छोड़ नहीं सकते सपनों को ,

जलती रहेगी आशा की लौ ,

किसी मोड़ पर मिलेंगे वो

कर दिया है तूम्हें मुक्त..... सरिता सैल

जब कभी पड़ता था

तुम्हारे माथें पर बल

और सिमट जाती थी

ललाट की सीधी सपाट रेखाएं

मैं रख देती थी धीरे से

तुम्हारे गम्भीर होंठो पर

अपनी उंगलियों को


मिसेज दीक्षित भाग-5.... अनुराधा चौहान


विनिता ने संस्कार के लिए घर में ढेर सारे खिलौने जगह-जगह रख रखे थे। संस्कार अंदर पँहुचते ही अपने खिलौनों में उलझ गया। कुमुद बहुत दिनों बाद घर में लौटी तो विनिता ने उसे दरवाजे पर रोक दिया।

 

आज बस यहीं तक 

फिर मिलेंगे आगामी गुरूवार। 

#रवीन्द्र_सिंह_यादव


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