कल निपट गई बुद्ध पूर्णिमा
बहुत सहा भगवान बुद्ध नें
बिहार से निकल कर
बहुत सहा भगवान बुद्ध नें
बिहार से निकल कर
सारे विश्व के हो गए बुद्ध
यशोधरा और राहुल को तजकर
चीन के, जापान के
लद्दाख के , तिब्बत के
हांगकांग के और श्री लंका के भी
सारे जहां के थे भगवान बुद्ध
बाकी बातें बाद में..
चीन के, जापान के
लद्दाख के , तिब्बत के
हांगकांग के और श्री लंका के भी
सारे जहां के थे भगवान बुद्ध
बाकी बातें बाद में..
चलिए रचनाओं की ओर

सिद्धार्थ से बुद्ध ... या ...
गौतम बुद्ध तक का सफ़र तय करके
तुम्हारे महानिर्वाण के वर्षों बाद
दिया गया था ज़हर सुकरात को
पिया भी उसने अकेले ही
पर बुद्ध ! ..तुमने स्व के यज्ञ में
दो मासूम मन की आहुति दी

यदि मैं भी शहीद हो जाऊं तो मां,
तुम तनिक नहीं फिर घबड़ाना।
तुमसे जाऊंगा दूर मगर,
पापा से तो मिल पाऊंगा।
पुरखों का
तर्पण ,पोतों का
व्याह रचाती थी ,
उत्सव ,कथा
व्याह में मंगल
गीत सुनाती थी
बेटी ,बहू
पराया ,अपना
सबके लिए दुआ थी |

जब ज़िंदगी मुख़्तसर है दुआएँ भी क्या करें
आधी मनाने में निकले आधी आज़माने में
ओढ़ रखी हैं जो उदासियों ने चादर
मुस्कुराहटें कह रही फेंक दे उतार के
फेंक कर सिक्के कभी दी गईं किसी मजबूर को
उसकी दुआएँ भी कभी लग जाती है इंसान को

मैं
ध्यानस्थ होती हूँ
स्वयं की खोज में
किंतु
इंद्रियों के सुख-दुख की
प्रवंचना में
अपने कर्मों की
आत्ममुग्धता के
अंधकार में
खो देती हूँ
आत्मज्योति।
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इस सप्ताह का विषय
यहाँ देखिए
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कल आ रही है विभा दीदी
सदाबहार प्रस्तुति लेकर
सादर
कल आ रही है विभा दीदी
सदाबहार प्रस्तुति लेकर
सादर