अंक जोड़ियेगा तो कितना आयेगा = 1. पंचम वर्ष की मेरी प्रथम प्रस्तुति
ब्लॉग पाँचवें वर्ष में प्रवेश कर गया
और
चुका नहीं सकते हम पाठकों का
राकेशधर द्विवेदी|
वैसे तो दोनों का नाम
'श' से प्रारंभ होता था
एक शोषित वर्ग का प्रतिनिधित्व करता था
और दूसरा शोषक वर्ग का।

यहाँ (बंबई में) कई दोस्त मिले जिनके साथ अच्छी-बुरी गुजरी।
कृष्ण चंदर, भारती, कमलेश्वर, जो शुरू ही में ये न मिल गए होते
तो बंबई में मेरा रहना असंभव हो जाता।
शुरू में मेरे पास कोई काम नहीं था
और बंबई में मैं अजनबी था।

मुद्द्त्तो के बाद मिली
पलक्षिण को समेट तो लू,
शाद ने भी
शाइस्तगी से ताकीद की,
हम न आएगे बार - बार..
भूल गए उनके कष्टों को ,
जीवन जिसने दांव लगाया।
घृणा और द्वेषो॑ का साया ,
सबके मन में अभी भी छाया।।

जिस समय जलवागाह की नींव डाली जा रही थी;
वो शायद मेरा न्यूनतम बिंदु था। हर प्रकार के संपर्क और सम्बन्ध
मैंने यथासंभव समाप्त कर डाले थे और जीवन की सार्थकता को
लेकर ख़ुद से तर्क-वितर्क मेरा प्रिय दैनिक मनोरंजन होता जा रहा था।
><
उऋण होने की कोशिश रहेगी
एक बार फिर चलते-चलते
अठहत्तरवें विषय की बात
विषय
अठहत्तरवें विषय की बात
विषय
किताब
उदाहरण
उदाहरण
किताबें करती हैं बातें
बीते ज़मानों की
दुनिया की, इंसानों की
आज की, कल की
एक-एक पल की
ख़ुशियों की, ग़मों की
फूलों की, बमों की
जीत की, हार की
प्यार की, मार की
क्या तुम नहीं सुनोगे
इन किताबों की बातें?
बीते ज़मानों की
दुनिया की, इंसानों की
आज की, कल की
एक-एक पल की
ख़ुशियों की, ग़मों की
फूलों की, बमों की
जीत की, हार की
प्यार की, मार की
क्या तुम नहीं सुनोगे
इन किताबों की बातें?
अंतिम तिथि- 06 जुलाई 2019
प्रकाशन तिथि- 08 जुलाई 2019
प्रकाशन तिथि- 08 जुलाई 2019
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