।।प्रातः वंदन।।
सच के भगौने में विवेक का पानी रख कर उसमें
श्रद्धा व विश्वास की चाय आदर एवम उत्साह से गर्म करें उर्मिला सिंह जी की
श्रद्धा व विश्वास की चाय आदर एवम उत्साह से गर्म करें उर्मिला सिंह जी की
स्पेशल चाय का नुस्खा साथ ही
आज हम बात करेंगे हमारेंं टीम की छोटी सदस्य आदरणीय श्वेता जी की..छोटे शब्दों में..
"आरास्ता हमारें ब्लॉग -ए -चमन की
आपके दम से है "
प्रकृति को शब्दों में बिखेर कर , खुशनुमा माहौल बना, सब को बाँध लेने की कला ..
बहुत खूब है।
सौम्य, सरल स्वभाव से परिपूर्ण, बड़ी आत्मीयता से सभी के साथ सम्बंध बना लेती हैं। सहज,सुरूचिपूर्ण तरीक़े से बड़ी शिद्दत से शब्द रूपी मोतियों को पिरोती हैं। यूँ तो आप कई ब्लॉगों से जुड़ी है, पर ब्लॉग "मन के पाखी " सम्स्त भावों का अवगुंठन है। जहाँ रचनाएँ मात्र शब्दों की अभिव्यक्ति नहीं बल्कि महसूस करने की क्षमता रखती है..कुछ इस तरह..
"अक्सर जब शाम की डोली
थके हुये घटाओं के
शानों से उतरती है
छनकती चाँदनी की पाजेब से
टूटकर घुँघरू
ख़्वाबों के आँगन बिखरती है
ख़ामोश दरख़्तों के
गीली बाहों मे
परिदों के सो जाने के बाद.."
🔅🔅
चलिए अब नज़र डालते हैं लिंकों पर..✍
आदरणीय ज्योति खरे जी ..
रुंधे कंठ से फूट रहें हैं
अब भी
भुतहे भाव भजन--
शिवलिंग,नंदी,नाग पुराना
किंतु झांझ,मंजीरे,ढोलक..
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आदरणीय दिगंबर नासवा जी..
कौन मेरे सपनों में आ के रहता है
जिस्म किसी भट्टी सा हरदम दहता है
यादों की झुरमुट से धुंधला धुंधला सा..
🔅
किताबों के पन्ने पलटने का खेल बहुत खतरनाक है, वह भी इतिहास की किताबें। अब इतिहास तो तुम्हारे पुरखे ही लिख गये थे, तुम्हारे अपने लोग ही बता गये कि उनके काल में क्या घटा था! बस तुमने कभी पढ़ा नहीं और आज ये पढ़कर आ गये। जैसे-जैसे इतिहास के पन्ने पलटते गये, संसद में मौन पसरता गया..
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह 'तृप्ति'..✍


