सादर अभिवादन।
आज विश्व उपभोक्ता दिवस है।
उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति सजग हो सके इस हेतु कुछ उपायों पर विचार किया जाता है तथा उपभोक्ता को व्यवसायियों द्वारा ठगे जाने से बचाने के लिए कार्यक्रमों एवं नीतियों की सारगर्भित चर्चा होती है।
भारत में भी राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 24 दिसम्बर को मनाया जाता है।
चलिए अब चलते हैं आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर -

२१ वर्ष की आयु तक हॉकिंग भी सामान्य मेधावी बालक थे जिसकी आँखों में सैकड़ो सपने थे एक दिन वो घटना घट गयी जिसने उन्हें एक अलग कैटेगिरी में धकेल दिया । जब वो 21 साल के थे तो एक बार छुट्टियाँ मानाने के मानाने के लिए अपने घर पर आये हुए थे , वो सीढ़ी से उतर रहे थे की तभी उन्हें बेहोशी का एहसास हुआ और वो तुरंत ही नीचे गिर पड़े।उन्हें डॉक्टर के पास ले जायेगा शुरू में तो सब ने उसे मात्र एक कमजोरी के कारण हुई घटना मानी पर बार-बार ऐसा होने पर उन्हें बड़े डोक्टरो के पास ले जाया गया , जहाँ ये पता लगा कि वो एक अनजान और कभी न ठीक होने वाली बीमारी से ग्रस्त है जिसका नाम है न्यूरॉन मोर्टार डीसीस ।इस बीमारी में शारीर के सारे अंग धीरे धीरे काम करना बंद कर देते है।और अंत में श्वास नली भी बंद हो जाने से मरीज घुट घुट के मर जाता है।डॉक्टरों ने कहा हॉकिंग बस 2 साल के मेहमान है। लेकिन हॉकिंग ने अपनी इच्छा शक्ति पर पूरी पकड़ बना ली थी और उन्होंने कहा कि
मैं 2 नहीं २० नहीं पूरे ५० सालो तक जियूँगा ।
मैं 2 नहीं २० नहीं पूरे ५० सालो तक जियूँगा ।

बीच शहर के, वो हृदय जो खोलते हैं,
पागल है वो!, सब यही बोलते है....
फितरत में, तो बस फरेब ही पलते हैं,
इस शहर में, कम ही लोग बोलते हैं...

ओठों से तब, लगा के अपने,
उसने छेड़ा प्रीत का गीत !
बाँस का टुकड़ा, बना बाँसुरी,
यायावर, प्राणों का मीत !!!!

ज़िन्दगी एक सफ़र है,
कोई होड़ नहीं,
कुछ देर इस मोड़ पर ठहरते है..
पल-दो-पल जीने के लिए ।

लख्ते-ज़िगर
तुझे मालूम नहीं
मुझे तेरी फिकर

हम-क़दम का दसवें क़दम
का विषय...
आज के लिए बस इतना ही।
मिलते हैं फिर अगले गुरूवार।
कल आ रही हैं श्वेता सिन्हा जी अपनी प्रस्तुति के साथ।
रवीन्द्र सिंह यादव