सादर अभिवादन।
वर्तमान सरकार के आख़िरी आम बज़ट पेश होने के बाद
शेयर बाज़ार की सेहत लगातार चितांजनक होती जा रही है।
पिछले मंगलवार निवेशकों के 5 लाख 40 हज़ार करोड़ रुपये
चुटकियों में डूब गये जिनकी भरपायी नामुमकिन है. आम राय
यह बना दी गयी कि यह नुकसान बज़ट के कारण हुआ है
जबकि इसके कुछ ठोस बाहरी कारक भी हैं। क्रेडिट रेटिंग
एजेंसियों के आंकलन और वैश्विक अर्थ व्यवस्था भी शेयर बाज़ार
को कुछ इसी तरह प्रभावित करते हैं। सरकार द्वारा शेयरों के
ज़रिये लम्बी अवधि के निवेश से होने वाली आय पर 10 प्रतिशत
टैक्स लगाने की घोषणा ने आग में घी का काम किया।
शेयर बाज़ार की सेहत लगातार चितांजनक होती जा रही है।
पिछले मंगलवार निवेशकों के 5 लाख 40 हज़ार करोड़ रुपये
चुटकियों में डूब गये जिनकी भरपायी नामुमकिन है. आम राय
यह बना दी गयी कि यह नुकसान बज़ट के कारण हुआ है
जबकि इसके कुछ ठोस बाहरी कारक भी हैं। क्रेडिट रेटिंग
एजेंसियों के आंकलन और वैश्विक अर्थ व्यवस्था भी शेयर बाज़ार
को कुछ इसी तरह प्रभावित करते हैं। सरकार द्वारा शेयरों के
ज़रिये लम्बी अवधि के निवेश से होने वाली आय पर 10 प्रतिशत
टैक्स लगाने की घोषणा ने आग में घी का काम किया।
दूसरी चिंताजनक ख़बर शिक्षा क्षेत्र है जहाँ से लगातार छात्रों
और शिक्षकों पर हमले और मौत की ख़बरें हैं जो हमें परेशान
कर रही हैं। समाज में हिंसा के प्रति नवोदित पीढ़ी का
बढ़ता रुझान ख़तरनाक है।
और शिक्षकों पर हमले और मौत की ख़बरें हैं जो हमें परेशान
कर रही हैं। समाज में हिंसा के प्रति नवोदित पीढ़ी का
बढ़ता रुझान ख़तरनाक है।
आइये अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलते हैं-
मौजूदा माहौल पर आक्रोश की अभिव्यक्ति के साथ उपस्थित हैं आदरणीया सुधा सिंह जी अपनी सम सामयिक रचना के साथ -
मौजूदा माहौल पर आक्रोश की अभिव्यक्ति के साथ उपस्थित हैं आदरणीया सुधा सिंह जी अपनी सम सामयिक रचना के साथ -

ओढ़ मुखौटा खूंखार भेड़िये
क्यों मीठा बोला करते हैं?
क्यों सांप्रदायिकता का जहर
परिवेश में घोला करते हैं?
हमारे जीवन को प्रभावित करते विविध बिषयों पर लिखती हैं
आदरणीया अपर्णा जी। पेश है उनकी एक बेहतरीन रचना-
हमारे जीवन को प्रभावित करते विविध बिषयों पर लिखती हैं
आदरणीया अपर्णा जी। पेश है उनकी एक बेहतरीन रचना-

चाहा था मैंने भी उतना ही
जितना तुमने;
साथ हमारा खिले
सुर्ख गुलाब सा।
सूखे गुलाबों की पंखुड़ियां
महकती हैं अब भी,
देश में नफ़रत का कारोबार आजकल ख़ूब फल-फूल रहा है।
आदरणीया अनीता जी आपसे रु-ब-रु हैं अपनी प्रासंगिक रचना के साथ -
आदरणीया अनीता जी आपसे रु-ब-रु हैं अपनी प्रासंगिक रचना के साथ -

भाई...अब तो डर लगता है
इंसान होने से
डर लगता है अपनी
ज़ात बताने से
न जाने कौन कब कहां
बैठा हो अंधभक्ति के साथ
और काट दे मेरा गला
ज़िन्दगी बीत जाती है उसे समझने में और उससे जुड़े अंतर्विरोधों का विश्लेषण करते-करते। आदरणीया डॉ.अपर्णा त्रिपाठी जी की
एक और सार्थक रचना आपकी नज़र -
ज़िन्दगी बीत जाती है उसे समझने में और उससे जुड़े अंतर्विरोधों का विश्लेषण करते-करते। आदरणीया डॉ.अपर्णा त्रिपाठी जी की
एक और सार्थक रचना आपकी नज़र -

कर चुके है शोर
बांध कर मजबूरियों के घूंघरू
वैसे तो और भी बहुत कुछ है बताने को
मगर मेरे ख्आयाल से
इतना ही काफी है
तुम्हारे सोचने के लिये
कि क्या कुछ और जानना चाहिये था
मुझसे मुहब्बत करने से पहले
आजकल देश की सरहद पर सैनिकों की शहादत हमें विचलित
कर रही है। पाकिस्तान की नफ़रतभरी हरकतें युद्ध जैसा
माहौल तैयार कर रही हैं।
सैनिकों के घरों में पसरे मातम पर आदरणीय जसवाल साहब की
एक भावविह्वल करती रचना आपकी सेवा में -

छाती पीट रही क्यों पगली, अभी कर्ज़ यम के बाकी हैं,
यहाँ मौत का जाम पिलाने पर आमादा, सब साक़ी हैं।
बकरों की माँ खैर मना ले, यहाँ भेड़िये छुपे हुए हैं,कुछ ख़ूनी जामा पहने हैं, पर कुछ के कपड़े ख़ाकी हैं।।
आदरणीय जोग साहब के फोटो-ब्लॉग सारगर्भित जानकारी तो देते ही हैं साथ ही
उनमें नवीनता और रोचकता का समावेश बख़ूबी अपनी छटा बिखेरता है।

ग्रहों और वृक्षों में क्या नाता है ये ना तो मालूम था ना ही कभी
जानने की कोशिश की. वृक्ष तो चाहे जैसे भी हों फायदे वाले ही होते हैं.
ग्रह की जानकारी तो अखबारी भविष्य फल पढ़ पढ़ कर आ गई थी की नवग्रह होते हैं :
1. सूर्य, 2. चन्द्र, 3. मंगल, 4. बुध, 5. गुरु, 6. शुक्र, 7.
शनि, 8. राहू और 9. केतु.
आदरणीय अमित जी अपनी विशिष्ट काव्य शैली के लिए ब्लॉग जगत् में जाने जाते हैं। नई कविता का कलात्मक एवं भावात्मक सौंदर्य परखने के लिए प्रस्तुत हैं उनकी एक अप्रतिम कृति-

इस बार
लेना चाहता था
सो उसने
ख़ूब सोच समझ कर
प्लास्टिक पैदा कर दिया
और लगा इंतज़ार करने
अपनी योजना के
परवान चढ़ने का
कुटिल मुस्कान के साथ.

कब तक उठाएँ गे हम बोझ जीवन का
हम-क़दम-5
सभी पाठकों के लिए एक खुला मंच है
हमारा नया कार्यक्रम
हम-क़दम ।
हमारा नया कार्यक्रम
हम-क़दम ।
आपका हम-क़दम अब पाँचवें क़दम की ओर.....
इस सप्ताह का विषय है...
...यह चित्र
:::: पहाड़ी नदी ::::...यह चित्र
परिलक्षित हो रहे दृष्यों को आधार मानकर
आपको एक कविता लिखनी है-
उदाहरणः
बनाती राह ख़ुद अपनी सँवारे ज़िन्दगी सबकी,
पाले गोद में सबको करे ना बात वो मजहब की।
करे शीतल मरुस्थल को वनों को भी दे जीवन,
सींचकर फसलों को वो खेतों को दे नव यौवन।
करे निःस्वार्थ वो सेवा न थकती है न रुकती है॥
नदी जब चीरकर छाती पहाड़ों की निकलती है॥
आप अपनी रचना शनिवार 10 फरवरी 2018
शाम 5 बजे तक भेज सकते हैं। चुनी गयी श्रेष्ठ रचनाऐं आगामी सोमवारीय अंक 12 फरवरी 2018 को प्रकाशित की जायेंगीं।
इस विषय पर सम्पूर्ण जानकारी हेतु हमारे पिछले गुरुवारीय अंक
आज के लिए बस इतना ही। मिलते हैं फिर अगले गुरूवार।
कल आ रही हैं आदरणीया श्वेता सिन्हा जी
अपनी प्रस्तुति में नये रंगों के साथ।
रवीन्द्र सिंह यादव अपनी प्रस्तुति में नये रंगों के साथ।
