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गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

4714 ...पेड़ ! सावधान रहना राजमार्ग से सटा जंगल अब सबकी निगाह में है।

 सादर अभिवादन

किताबें और माँ बाप की बातें 
जिंदगी में  कभी धोखा नहीं देती


रिश्तों को रिश्तेदारों पर मत छोड़ो, 
खुद अपने निर्णय लें 
आपस मे बात करें, अगर
अपनी गलती हो तो स्वीकार करें।

रचनाएं ....



हमने तुम्हें
हमेशा शक की नज़र से देखा

तुम हँस दो तो
“इशारा”
तुम चुप रहो तो
“घमंड”

तुम किसी से बात कर लो तो
“चरित्र”
और न करो तो
“रहस्य”

तुम्हारे जीवन का हर रंग
हमने
अपनी सुविधा से तय किया।




लिख डाले कितने खत
जोश में हमने
तुम्हारे लिए

कितने ही कोरे कागज
रंग डाले हमने
तुम्हारे लिए




कविता सिर्फ शुरुआत है—
और वही कविता सबसे पूरी है
जो अधूरी रह जाती है,
क्योंकि
कविता कभी पूरी नहीं होती।




पेड़ !
सावधान रहना
राजमार्ग से सटा जंगल
अब सबकी निगाह में है।
फ्लाईओवर, मोबाइल टावर, सिगरेट, आरियां, 
सब दिन दहाड़े घात लगाए बैठे हैं...





इनके बचपन के संग - संग में 
अपना बचपन जी लेती हूँ 
मेरे आँगन हर दिन आये 
ऐसे ही बचपन का झोंका 
जिनमे झूम के मैं गाऊँ 
हर दिन खुशियों से भर जाऊँ ।





काफी दिनों बाद पति का स्पर्श कलाई पर महसूस हुआ तो वह भावुक हो गई। पति बोला " चलो अपने घर चलते हैं। " इतना सुनते ही रौनक बोली " तलाक के कागजों का क्या होगा..??? " पति बोला " फाड़ देंगे। इतना सुनते ही वह दहाड़ मार कर पति के गले से चिपट गई। 




तन्मयता से अभ्यास वह,कर रहा था तीर चलाने का ।
अलग-अलग अंदाज में ,निशाना वह वहांँ लगाने का।
ध्यान भंग कर गुरुवर ने पूछा,कौन तुम्हारे गुरु है तात। 
कौन तुमको तीर चलाने की,यह  विद्या देते हैं सौगात।
कहा एकलव्य ने विनीत भाव से,मैंने गुरु आपको माना। 


सादर समर्पित
सादर वंदन
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