सादर अभिवादन
आज ठीक हूँ
धूप में बैठने का मन हुआ
वाकई विटामिन डी शरीर के लिए फायदेमंद होता है
आइए पढ़िए..
नए रिश्तों में बंधी
माँ , नानी , दादी , बुआ ,
बहू , बेटी संग मेरे पड़ोस वाली सहेली
सिलाइयों की बारीकियाँ
उकेरती रंगीन धागों से मनुहार
और एक मेरी मीठी सी मनुहार
जो तुम मुझे धूप में ला के
बरबस अपने गले से लगाती
शरद की मीठी गुनगुनी धूप
एक आँगन की याद दिलाती ..!
आँखों पर पट्टी बाँध लेना
यानी सच को अनदेखा करना ।
यह नहीं है केवल बाह्य दृश्यों
नज़र बचाना,
बल्कि अक्षम होजाना है
ज्ञान-चक्षुओं का भी ।
मुँह मोड़ लेना है यथार्थ से ।
यों बचकर निकलजाना ,
बढ़ते पैरों ने
शुरु कर दिया
घेरना
अंदर की
थोड़ी बहुत
बची हुई
गर्मी को
नरमी भी
जरूर हुआ
करती होगी
साथ में
उसके कभी
निश्चित
तौर पर
सौ आने
उसका
बहक जाना
जो तूने मुझे चुना।
जब खुशियाँ दी तूने,
मैंने आसमान छुआ।
जब दु:ख दिये तूने,
मैंने अंतस को छुआ।
भीतर-बाहर दोनों का
रस,भर-भर के पिया।
संध्या—
किसी बूढ़ी नदी की
खामोश, काँपती रीढ़-सी
धीमे सुर में ढलती है—
उसकी लहरें
मन के तल से उठकर
आँखों में चमकती हैं—
जैसे भीतर का दीप
अपना अंतिम उजाला बाँट रहा हो।
आज बस
सादर वंदंन
