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गुरुवार, 5 सितंबर 2024

4237...आज शिक्षक दिवस है ...

सादर अभिवादन।

हमारे भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का आज जन्मदिवस है जिसे हम हर्षोउल्लास के साथ शिक्षक दिवस के रूप में मानते हैं।पाँच लिंकों का आनन्द परिवार की ओर से शत-शत नमन,पुण्य स्मरण एवं समस्त शिक्षकों को सादर नमन व हार्दिक शुभकामनाएँ।  

गुरुवारीय अंक में आज पढ़िए पाँच चुनिंदा रचनाएँ-

5 सितम्बर - शिक्षक दिवस

तमिलनाडु के तिरुतनी नामक गांव में 5 सितम्बर 1888 को जन्मे डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् प्रकांड विद्वान, दार्शनिक, शिक्षा-शास्त्री, संस्कृतज्ञ और राजनयज्ञ थे। वे सन् 1962 से 1967 तक भारत के राष्ट्रपति भी रहे। इस पद पर आने के पूर्व वे शिक्षा जगत् से ही सम्बद्ध थे। मद्रास में प्रेजीडेंसी कालेज में वे दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक रहे। सन् 1936 से 1939 तक वे आॅक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पूर्वी देशों के धर्म और दर्शन के स्पाल्डिंग प्रोफेसरपद पर रहे। उन्होंने अपने लेखों और भाषणों के माध्यम से विश्व को भारतीय दर्शनशास्त्र से परिचित कराया।

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शिक्षक दिवस के बहाने...

यूँ तो सवैतनिक गुरुओं को हम हमारे विद्यालयों, महाविद्यालयों व अन्य शिक्षण संस्थानों में पाते हैं, परन्तु अवैतनिक गुरु तो हमारे जीवन में पग-पग पर, पल-पल में मिलते हैं।

चाहे वो अभिभावक के रूप में हों, सगे-सम्बन्धियों के रूप में हों, सखा-बंधुओं के रूप में हों या प्रेमी-प्रेमिका के रूप में या फिर शत्रु के रूप में।

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एक शिक्षक क्या चाहे, बस थोड़ा सा सम्मान

दर्शन शास्त्र के प्राध्यापक रह चुके राधाकृष्णन पढाने से पूर्व उस विषय का गहन अध्ययन करते थे और दर्शन शास्त्र जैसे निरस और बोझिल विषय को भी इतने सरल तरीके और रोचक शैली में पढ़ाते थे कि छात्रों को वह आसानी से समझ में आ जाता था।

वर्तमान समय में देखा जाए तो समय के साथ - साथ शिक्षक न केवल अपना सम्मान अपितु महत्व भी खोता जा रहा है।क्या वजह है?

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रिश्तों का उपवन

जरुरी है... 

मौसम का बदलना 

रिश्तो के उपवन में 

उर्वरता बनी रहती है

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कहानी । अपने पापा जी। अभिज्ञात । वनमाली कथा। भोपाल

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फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 


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