सादर अभिवादन
मातृ दिवस ...
मातृ दिवस माता को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है. एक मां का आँचल अपनी संतान के लिए कभी छोटा नहीं पड़ता। माँ का प्रेम अपनी संतान के लिए इतना गहरा और अटूट होता है कि माँ अपने बच्चे की खुशी के लिए सारी दुनिया से लड़ लेती है। एक मां का हमारे जीवन में बहुत बड़ा महत्व है, एक मां बिना ये दुनिया अधूरी है। यह मदर्स डे है और
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में कई देशों में 8 मार्च को मनाया जाता हैं।
दोनों में अंतर है
आइए देखे कुछ रचनाएं ...
कैसे कहूँ,किस सरिता में बहूँ
ममता तेरी,भावों में बाँध नहीं पाती हूँ
कैसे बताऊँ माँ तुम क्या हो?
चाहकर भी,शब्दों में साध नहीं पाती हूँ
सब कह रहे हैं
आज मातृ दिवस है
तुझे याद करने का दिन
पर याद तो तब किया जाता है न माँ
जब किसी को भूला जाए
तो क्या जो आज का दिन मनाते हैं
भूल चुके हैं माँ को .
माँ खुशियों की
वो मास्टर की है
जो हर ताले को
खोल देती है
माँ तो बस जादू है
ये
थाली
है खाली
शिशु रोता
रोटी का टोटा
माँ भूख मिटाती
नभ चाँद दिखाती।
मां जब तक धरा पर रहती है,
सुत की खातिर दुख सहती है,
खुद भूखी रह, उसे खिलाती,
कभी ईश्वर, गुरु बन जाती।
चिंता करती सुत की हर पल,
देती आशीष, सुनहरा हो कल।
माँ के लिए मैं क्या लिखूं,
माँ ने तो खुद मुझे लिखा है.......
माँ से छोटा कोई शब्द हो तो बताओ,
माँ से बड़ा भी कोई हो तो बताओ........
जीवन की धूप में
छाया बन चलती है,
दुविधा के तमस में
दीपक बन जलती है !
कहे बिना बूझ ले
अंतर के प्रश्नों को,
अंतरमन से सदा
प्रीत धार बहती है !
जिसके रूठ जाने से कबूल
मंदिर में पूजा और
मस्जिद में अजां नहीं होती
कदर किया करो "दोस्तों"
बेवजह प्यार लुटाने को
सब के पास माँ नहीं होती ||
कितनी और रचनाएँ उपस्थित करूं
हाथ थक गया, उंगलियां अकड़ गई
माँ पर कोई लिख सका है भला
माँ सारा कुछ लिख डालती है
पल भर में जीवन का हर एक
लम्हा माँ की याद ले आता है
और उसकी छवि बना जाता है
आज बस
कल फिर मिलूंगी
सादर वंदन







