सादर अभिवादन
सु. सि. की कलम से ...
इतना हलचल भला क्यों कर ..?
बदलेगा तो बस एक कैलेंडर ...
आंग्ल नववर्ष की शुभकामनाएं
अब देखिए आज की रचनाएं
गुलामी का सम्पूर्ण अंत ......बने माध्यम हमसब
कान्वेंट शब्द पर गर्व न करें, सच समझे ‘काँन्वेंट’ सबसे पहले तो यह जानना आवश्यक है कि ये शब्द आखिर आया कहाँ से है, तो आइये प्रकाश डालते हैं।
दस्तक दे नव भोर जतन हो
स्वप्न अधूरा मत रह जाये,
नये वर्ष में हर कोई मिल
जीवन का गीत गुनगुनाये !
गली का हर कोना स्वच्छ हो
गौरैया को दाना डालें,
ख्वाब अधूरा जो वर्षों का
अंजाम पर उसे पहुँचायें !
आसमान में उड़ी पतंग
दूर-दूर तक चली पतंग
कभी लड़ी फिर कटी पतंग
गिर कर भी फिर उड़ी पतंग
दिल को थोड़ा और चमकाया
थोड़ा और खरा किया
हर रोज मानस का एक पन्ना दिन की शुरूआत बना
अब मुसकाया ये आज का इतवार
और बोला बड़े अपनेपन से
लिस्ट भले पेंडिंग रही
लेकिन हर दिन पहले से बेहतर तुम हुई
नए साल में नया क्या है?
वही पुराने महीने,
वही पुराने दिन,
बस तारीखों को मिल जाते हैं
बदले हुए वारऔर चार साल में
फ़रवरी के हिस्से आ जाती है
एक दिन की भीख।
जिनका फुटपाथ पे, आशियाना सजा,
मुनिया पढ़ती दिखी, क्या नया साल है?
झुग्गियों में भी कुछ, झालरें लग रहीं,
आ रही रोशनी, क्या नया साल है?
प्रेम-सौहार्द की एक नौका सजी,
देश में बह रही, क्या नया साल है?
सन 23 भी
रहा बहुत शुभ
सन 24 भी मंगल हो.
गंगा जैसा
मन पावन हो
सरयू जैसा निर्मल हो.
पर जो भी हो हम, हमारा परिवार, हमारे हितैषी, हमारे शुभचिंतक परमानंद में हैं ! उधर हमारी माँ घोर आशावादी और क्षमाशील हैं ! उन्होंने कह दिया है, ऐसे शुभ अवसर का निमंत्रण तो सबको जाएगा, जिसे आना हो आएगा, जिसे नहीं आना उसकी इच्छा ! हम अपनी तरफ से कोई शिकायत का मौका नहीं देंगे ! बाकि भगवान सबको सद्बुद्धि दे !
आज बस
एक जनवरी 2024
कल सखी आएगी
सादर





