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शनिवार, 1 जनवरी 2022

3260... नूतन वर्ष

   

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को भारत में हमारा नववर्ष है... लेकिन हम दूसरों की खुशियों में दुखित होने वाले थोड़े न हैं....

ह न त...

हाज़िर हूँ...! पुनः उपस्थिति दर्ज हो...

नये साल की आमद

गै़र के घर की रौनक है वो

अब वो मेरा क्या लगता है.

दुनिया पीछे दिलबर आगे

मन दुविधा मे सोच रहा है.

तख्ती पे 'क' 'ख' लिखता वो-

बचपन पीछे छूट गया है

नूतन वर्ष

नहीं लुटेगी अब कभी, ललनाओं की लाज।

भय से होगा मुक्त अब, अपना देश-समाज।।

कुर्सी के मद में नहीं, कोई चले कुचाल।

दहशतगर्दों की नहीं, गलने पाये दाल।।

राजा और वज़ीर अब, सुने सभी के दर्द।

अधिकारी हों देश के, जनता के हमदर्द।।

नूतन वर्ष : महावीर

अपनी रूह को बेकरार करो ,

जज़्बात-ओ-ख्यालों का इज़हार करो ,

चुप रह कर सितम और भी बढ़ जाते हैं ,

कुछ तो बोलो खुदी से प्यार करो !

आज हर सिम्त उरयानी ही उरयानी है 

नूतन वर्ष

गृह-विहीन बन वन-प्रयास का

तप्त आँसुओं, तप्त श्वास का,

एक और युग बीत रहा है,

आओ इस पर हर्ष मना लें!

उठो, मिटा दें आशाओं को,

दबी छिपी अभिलाषाओं को,

आओ, निर्ममता से उर में

यह अंतिम संघर्ष मना लें!

नूतन वर्ष

जीवनतरु के नवपल्लव में 

नव आशा के पुष्प सजाएं 

अपने तो सदा अपने हैं

गैरों को भी मीत बनाएं 

नए-नए रंग हों नई उमंगें 

नयनों में उल्लास जगाएं 

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पुनः भेंट होगी...
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