हाज़िर हूँ...! उपस्थिति दर्ज हो...
हमारे पूर्वज कहते थे कि पीपल, बरगद, गूलर, नीम बेल के वृक्ष नही काटना चाहिए, इससे वंश का नाश होता हैं। यह कथन आज ऑक्सीजन की कमी से जूझते लोगो को देखकर सिद्ध हो रहा है।
जिन लोगों ने अभी तक इस वासा (अडूसा, बाकस) का उपयोग किया उन्होंने पहले से काफी राहत महसूस किया। चूंकि हम इसे मंगवा कर पीड़ित लोगों के घर तक निःशुल्क पहुंचा रहे हैं तो इसके लिए उन लोगों ने हमें फोन करके धन्यवाद दिया। पर असली धन्यवाद के पात्र तो यह औषधि है, जो लोगों की कफ, खांसी और फेफड़ों की समस्या को दूर कर रहा है। खुशी हो रही कि बिहार के बाहर वाले कई लोगों ने इसकी माँग की। कल तक उनलोगों का भी पार्सल भेज दिया जाएगा। जिन्हें निःशुल्क चाहिए 9334821929 पर संपर्क करें।हर इंसान अकेला ही तो होता है,
अपने सुख-दुख का एहसास,
सिर्फ उसे ही तो होता है।
सुनते है सब,सहता तो वो ही है।
अपने हक़ में खुदा से कहता तो वो ही है।
हर एक की पीड़ा,
हर एक ही जानता है।
अपने अंदर ही बसे है ईश्वर,
ये बात हर कोई नहीं मानता हैं।
आज कुछ कमजोर हूँ, पर लाचार नहीं।
बेशक मुझे जल्दी है सपनों की, पर किसी गुनाह का मैं तलबगार नहीं।
रफ़्ता रफ़्ता ही सही , कभी तो आएगा वो खुशी का मन्ज़र।
अपनी ख्वाहिशों को समेटे, बस चलता जा रहा हूँ।
मैं अकेला हूँ और अकेला चला जा रहा हूँ।।
जीना किसी ने सिखाया तो नहीं
फिर भी खुद से खुश कैसे रहते हो?
ना गए कल की फिक्र करते देखा
ना आने वाले का अफसोस है
बताओ आज में मशगूल कैसे रहते हो?
अकेले रहना सीख गए हो
रोज रोज मेरा साथ देने के नाम पर तुम ,
कुछ देर मुझसे मिलने भी चली आती हो ;
फिर तुम ही बताओ क्यों तुम बार-बार ,
मुझे ऐसी दोहरी दुविधा में डाल जाती हो ;
यूँ रोज कल आने का बोल कर तुम मुझे ;
क्यों रोज यूँ अकेला छोड़ जाती हो !
ये समझने के लिए चाहे जितने लोग भी आपके साथ क्यों न चल लें,
कुछ सफ़र आपको अकेले ही तय करने होते हैं।
सच कहूं तो अकेलापन उतना ही खूबसूरत है,
जितना किसी के साथ होना।
उतना ही पाक जितना मंदिर में जल रहा अकेला दिया।
उतना ही सुकून देने वाला जितना माँ का आँचल।
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शायद पुन: भेंट होगी...
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