सारा सारा गम हमारे ही जिम्में
अब का करें, सिर फोड़ें अपना
या फिर उन चार फुटियों के हाथ पैर तोड़ें
इतना क्यों पढ़ते हैं हम
फॉरवर्ड भी करते हैं
गरम पानी पियो , भाफ खींचो नाक से
काली मिर्च का काढ़ा पियो
ये सब फॉरवर्ड करने के लिए नहीं न है
अमल में लाने को लिए है...
आइए देखें नया कुछ है का

एक पल पर्दा उठा, नज़रें मिलीं, उफ़ क्या मिलीं,
हो वही बस एक पल फिर जिंदगी जाए ठहर.
धूप नंगे सर उतर आती है छत पर जब कभी,
तब सुलग उठता है घर आँगन गली, सहरा दहर.
शब्द जैसे बांसुरी की तान मीठी सी कहीं,
तुम कहो सुनता रहूँगा, काफिया हो, क्या बहर.

छोटी सी जिन्दगी, अनुभव बड़े दे रही है,
और मै इस दर्द भरे एहसास और अनुभव को,
अपने शब्दों में पिरो कर कोरे कागज पर उतार कर,
इस दर्द को कम करने की कोशिश कर रहीं हूँ!
रूठी है किस्मत,मगर हिम्मत है हारी नहीं!
इतनी आसानी से हालत के आगे,
मैं घुटने टेकने वाली नहीं!

पहले ने लिखा – “रोटी भोजन है”।
दूसरे ने लिखा – “यह आटे और पानी का मिश्रण है”।
तीसरे ने लिखा – “यह ईश्वर का वरदान है”।
चौथे ने लिखा – “यह पकाया हुआ आटे का लौंदा है”।
पाँचवे ने लिखा – “इसका उत्तर इसपर निर्भर करता है कि ‘रोटी’ से आपका अभिप्राय क्या है?”
छठवें ने लिखा – “यह पौष्टिक आहार है”।
और सातवें ने लिखा – “कुछ कहा नहीं जा सकता”।

जड़ पर बस चलता चेतन का
मन जड़ होने से है डरता,
पल भर यदि निष्क्रिय हो बैठे
चेतन भीतर से पुकारता !
लेकिन मन को क्षोभ सताए
अपना आसन क्यों कर त्यागे,
जन्मों से जो सोता आया
कैसे आसानी से जागे !
...
पम्मी दीदी की तबियत मे सुधार है
परिवार स्थिर है
राम भला करे
सादर
पम्मी दीदी की तबियत मे सुधार है
परिवार स्थिर है
राम भला करे
सादर