जय हिन्द जय हिन्द की सेना
हिन्दुस्तानियों पर छाया नशा तिरंगे की आन का है,
जगत को बेहद भाया नशा मातृभूमि की मान का है
शाखें कट भी गईं तो ठूंठ से कोपल निकलते देखा है
हाँ! अपने देश में दमन-दलदल से भी संभलते देखा है
समकोटीय यशस्वी मंदिर मस्जिद गिरजा और गुरुद्वारा
अधिकारों संग दायित्व सिखलाए ऐसा संविधान हमारा
बिलखती आज़ादी का स्वच्छंद परिंदा
हमारे नैतिक मूल्यों के हर क्षेत्र में गिरावट आयी है। भारत
आज आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक मोर्चे पर विषमताओं से
जुझ रहा है। यह सब क्यों हो रहा है। हमारे विचार में इसकी एक मूल वजह है
हमारी आजादी और उसकी सीमा। यक्ष प्रश्न है कि
हमारा अधिकार और हमारी आजादी कहां तक है।
याचना नहीं अब रण हो
हमारा यह नैतिक दायित्व है कि ऐसे संदिग्ध लोगों पर निगाहें रखी जाएँ ?
हमारा भी अपना धर्मपथ एवं कर्मपथ है, इन शहीद जवानों की ही तरह-
कर्मपथ पर सीना ताने,
वीर जवान चल दिये,
माँ भारती के थे दुलारे,
धर्मपथ पर चल दिये।
अपने आप को खोजने का
हम में से प्रत्येक उस समाज में रहता है जहाँ हमारे कानून राज करते हैं।
एक स्वतंत्र व्यक्ति होने का मतलब यह नहीं है कि पिछली पीढ़ियों द्वारा
जमा की गई हर चीज से इनकार करना। अतीत की विरासत से
संबंधित होना उचित होना चाहिए, जबकि सभी के व्यक्तित्व और
सम्मान के लिए सम्मान बनाए रखना चाहिए।
हिन्दी बोल लें
ऐतराज/ - आपत्ति
सियासत/ - राजनीति
इंतकाम/ - प्रतिशोध
इज्जत/ - मान, प्रतिष्ठा
इलाका/ - क्षेत्र
एहसान/ - आभार, उपकार
अहसानफरामोश/ - कृतघ्न
मसला/ - समस्या
'ह' से हिन्दू 'म' से मुसलमान
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पुन: मिलेंगे
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'बादल'
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15 अगस्त 2020 आज शाम तक।
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