
आज विश्व रक्तदाता दिवस है
विश्व रक्तदान दिवस हर वर्ष 14 जून को मनाया जाता है विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस दिन को रक्तदान दिवस के रूप में घोषित किया गया है। वर्ष 2004 में स्थापित इस कार्यक्रम का उद्देश्य सुरक्षित रक्त रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना और रक्तदाताओं के सुरक्षित जीवन रक्षक रक्त के दान करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करते हुए आभार व्यक्त करना है।
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आँधी और तूफान,वृक्षों का जड़ों से,उखड़ जाना,आम बात है
हिमांचल प्रदेश में सूचना भी मिली ..और समाचार में भी बताया गया
आज हमारी पसंद देखिए....
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सबसे पहले सआदत हसन मंटो
बू ......सआदत हसन मंटो

बरसात के यही दिन थे। खिड़की के बाहर पीपल के पत्ते इसी तरह नहा रहे थे। सागवान के इस स्प्रिंगदार पलंग पर जो अब खिड़की के पास से थोड़ा इधर सरका दिया गया था एक घाटन लौंडिया रणधीर के साथ चिपटी हुई थी।
खिड़की के पास बाहर पीपल के नहाए हुए पत्ते रात के दूधिया अंधेरे में झूमरों की तरह थरथरा रहे थे और शाम के वक़्त जब दिन भर एक अंग्रेज़ी अख़बार की सारी ख़बरें और इश्तिहार पढ़ने के बाद कुछ सुनाने के लिए वो बालकनी में आ खड़ा हुआ था तो उसने उस घाटन लड़की को जो साथ वाले रस्सियों के कारख़ाने में काम करती थी और बारिश से बचने के लिए इमली के पेड़ के नीचे खड़ी थी, खांस खांस कर अपनी तरफ़ मुतवज्जा कर लिया था और उसके बाद हाथ के इशारे से ऊपर बुला लिया था।
बदलते रंग ..मुकेश सिन्हा

मृत्यु कभी कठिन नहीं
होती होती है कठिनतम वो सोच
कि कहीं मर गया तो ?
इस 'तो' में समाहित है न, कितना दर्द।
महसूस कर पाया पिछले सप्ताह।
तोरण एक बनाना ...ऋता शेखर 'मधु'

जिनके दृग की ज्योति छिन गई
मन उनका रौशन कर देना।
रंगोली जिस द्वार मिटी है
रंगों की छिटकन भर देना।।
ख्वाबों के मोती चुन चुन कर, तोरण एक बनाना प्रियवर।
अँधियारी रातों का साथी, बनकर साथ निभाना प्रियवर।।
बढ़ती उम्र ...आशा सक्सेना

सुबह काम शाम काम
ज़रा भी नहीं आराम
अब होने लगी है थकान
जर्जर हुआ शरीर।
पीछे छूटे खट्टे मीठे
अनुभवों के निशान
मस्तिष्क की स्लेट पर
पुरानी यादों के रूप में।
प्रेम और ॐ ...रोली अभिलाषा

कभी ग़ौर से देखा है
अपनी दायीं हथेली की तर्जनी को
कुछ नहीं करती सिवाय लिखने के,
चूमती रहती है कलम को
जब गढ़ रहे होते हो सुनहरे अक्षर
....मेरी आँखों के
तुम्हारे शब्द चूमने से भी पहले.
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हमें पसंद नहीं आते सआदत हसन और
गाई द मोंपासा....पता नही क्यूँ
पसंद की जाती है उनकी कहानियाँ...
औरतों को बेपरदा करना
दोनों को बखूबी आता है
कभी पढ़िएगा खरीद कर
उनकी किताबें...
कल फिर मिलेंगे हम
सादर