।। उषा स्वस्ति ।।
अरुणोदय की पहली लाली इसको ही चूम निखर जाती
फिर संध्या की अंतिम लाली इस पर ही झूम बिखर जाती
इस धरती का हर लाल खुशी से
उदय-अस्त अपनाता है ।
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है..!!
गोपालसिंह नेपाली
सुहानी भोर की अपेक्षाओं संग हम सभी निकल पड़े हैं क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में
(अनलॉकडाउन के बाद ) अब हम ही अर्जुन है
और हम ही कृष्ण की भूमिका में है, तो फिर समय न गवाते हुए बढ़ते हैं चुनिंदा लिंकों की ओर..✍
और हम ही कृष्ण की भूमिका में है, तो फिर समय न गवाते हुए बढ़ते हैं चुनिंदा लिंकों की ओर..✍
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घिर रहा तिमिर चहुँ ओर
है अवसान समीप
बंजर जमीनों पर
बोते रहे ताउम्र खोखले बीज
बेमानी गठरियाँ पोटलियाँ
ढोते रहे दुखते कन्धों पर..
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देश में फैली है एक महामारी,जिसका नाम है कोरोना
इस संकट से पार है अगर पाना, तो हाथ लगातार धोना।।
जरा ध्यान करों उन लोगों का भी, जो घर पर भी न रुक पाते हैं।...
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माना घर के लिए जंगल कटा।
मनीप्लांट मुस्करा रहा,
नीम रोया छटपटा।
घर के सपनों से कालिमा हटा,
भाग्य से पन्ना बदला दीमक चटा।
वर्षों से ढूँढ़ रही हूँ,
एक परिवार में एक अंश पर
सबका विचार सिमटा।
माना घर के लिए जंगल कटा
माया शनॉय श्रीवास्तव: :आइये एक बात बताती हूँ
ध्यान से सुनियेगा चेताती हूँ
खाती अंडा नहीं उबालती हूँ
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तफ़तीश-अफ़सर को देखकर सबने अपने-अपने खिड़की-दरवाज़े बंद कर लिए। तरबूज़, ख़रबूज़ा और ककड़ी आवाज़ लगाकर बेचता एक ठेलेवाला आ गया।
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हाथ ही दर्द हो तो क्या कीजे।
....... राजनाथ सिंह जी
पंजे का यह रोग जिससे शहज़ादे कांग्रेस ग्रस्त हैं अभी अबूझ ही बना हुआ है। इस रोग के फैलने की वजह क्या हैं हेतुकी क्या है फिलाल अनुमेय ही है। कुछ एपिडिमीयालजी के माहिर इसे न्यूरो -डिजेनरेटिव रोग बतलाते है। यानी..
नहीं किसी को क़रार मुमकिन, नहीं है कोई सवाब तौबा
अजब- ग़ज़ब है ये ज़िन्दगी है सभी का खाना ख़राब तौबा
निज़ाम उसका अलग-थलग है, हज़ार रोड़े लिए खड़ा है
कभी तो धरना, कभी है स्ट्राइक मिला है जब से ख़िताब तौबा..
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।। इति शम ।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ‘तृप्ति’...✍



