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गुरुवार, 17 दिसंबर 2015

152....सारी दुनिया का अँधेरा मिलकर भी एक दीपक से उसकी रौशनी नहीं छीन सकता. इसलिए चमकते रहो !

आप सभी को संजय भास्कर का नमस्कार
 पाँच लिंकों का आनन्द ब्लॉग में आप सभी का हार्दिक स्वागत है !!

सारी दुनिया का अँधेरा मिलकर भी 
एक दीपक से उसकी 
रौशनी नहीं छीन सकता. 
इसलिए
चमकते रहो !


स्वर्गीय गुरु तेग बहादुर
आज शहीदी दिवस

कविता मंच में..
योवन की पहली आहट जब ,लेने को आई अंगडाई
कोमल भावों ने धीरे से ,मन को ये आभास कराई

वर्षों से कल्पित आभा को ,आज पूर्ण साकार मिला है
भावों की बूंदों को मेरी ,नदिया का आकार मिला है


शुभ सुरुचि में
हर ओर चीख है पुकार है
हो रहा है क्रंदन ....
जुर्म कि दीवार के पीछे
है कैसा वहशीपन ....


मेरी धरोहर में
मांगने पर भी
जो मिल न पाया
ऐसा कुछ छूटा हुआ
बिछड़ा हुआ
कभी न कभी
याद आया
तो ज़रूर होगा !!


आकाक्षा में
मां ने देखी थी दुनिया
जानती थी है वहां क्या
तभी रोकाटोकी करती थी


शहर में
कहना
अलविदा किसी से
हमेशा बेहद मुश्किल होता है
अलविदा दिन अलविदा एक और शाम
कल
फिर होगी
हर शहर की एक नई सहर
ताज़गी और जीवन ऊर्जा से भरपूर


आज संजय जी नहीं आ सके
कोई तो होगी वजह
सबब मैं पूछूं क्यों

आज इतना ही
आज्ञा दें यशोदा को

सादर





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