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सोमवार, 22 जुलाई 2019

1466...हम-क़दम का अस्सी नम्बर का अंक....अहसास.

स्नेहिल अभिवादन
--------
सोमवारीय विशेषांक में आप सभी का
स्वागत है।
आइये महसूस करें एहसास के विविध रूपों को-
★
एहसास
------
जीवन के बेढब कैनवास पर
भावों की कूची से
उम्रभर उकेरे गये
चेहरों के ढेर में ढूँढ़ती रही 
एहसास की खुशबू 
धूप ,हवा ,पानी, जैेसा निराकार
और ईश की तरह अलौकिक,अदृश्य
तृप्ति की बूँद,
देह के भीतर स्पंदित श्वास
सूक्ष्म रंध्रों से मन की तरंगों का
चेतना के तटों से

टकराकर लौटने का अनहद नाद 
भ्रम ,माया,मरीचिका के 
मिथ्य दरकने के उपरांत
उकताया,विरक्त
सुप्त-जागृत मन ने जाना 
एहसास का कोई चेहरा नहीं होता

#श्वेता
★★★★★★

कालजयी रचनाएँ

तुम्हारा अहसास ... कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
मन नहीं मानता है अभी भी
तुम्हारा न होना,
हर आहट,
हर दस्तक पर अहसास
कि हो तुम्हारा आना
पर
तुम तो चमक रहे

दूर आसमान पर बन कर सितारे,

हम अपनी मोहब्बत को अहसास नया देंगे .... रंजना वर्मा

हम अपनी मुहब्बत को अहसास नया देंगे 
हैं प्यार किसे कहते दुनियाँ को दिखा देंगे

अब तक तेरी उल्फ़त के हम गीत रहे गाते 


तुझको नहीं गवारा तो दिल से भुला देंगे

एहसास तुझे भी है मुझे भी ...राहुल तिवारी

एक आग तुझमें भी है
एक आग मुझमें भी

फिर भी तुम दूर जा बैठी हो

इतनी नाजुक सी हालात में
इसका एहसास तुझे भी है
एहसास मुझे भी


-*-*-*-*-*-

उदाहरणार्थ ली गई रचना
आदरणीय सुबोध सिन्हा जी

अहसासों के झांझ ....
सुनो ना !
सोचा है आज
तुम तनिक अपने
मन की राई से
अहसासों के झांझ वाले
प्रेम का तेल
बहने दो ना जरा ...


-*-*-*-*-*-
सम्पर्क फार्म द्वारा आई रचनाएँ
सुविधानुसार प्रस्तुत की गई है..

आदरणीय डॉ. सुशील सर..
(दो रचनाएँ)
लगा जैसे 
कुछ हुआ 
थोड़ी देर के 
लिये ही सही 

नंगे जैसे होने का 
कुछ अहसास हुआ 

हड़बड़ी में अपने ही 
हाथ ने अपने 
ही शरीर पर 
पड़े कपड़ों को छुआ 

★★★★★★
गिद्धों 
के बहुत 
नजदीक 
ही कहीं
आस पास में 
होने का 
अहसास 
बढ़ रहा है 

कुछ 
नोचा जा रहा है 
आभास हो रहा है 
★★★★★★
आदरणीया अनुराधा चौहान जी
हमारे प्यार के अहसासों से भरी हुई
हर बार तुम्हारे होने का अहसास देती
देखो खाली पलंग देख रो मत देना
मेरे होने का अहसास बना रहने देना
बालकनी में रजनीगंधा आज़ भी लगा है
वैसा ही है जैसा तुम लगाकर गए थे

★★★★★


आदरणीया अभिलाषा चौहान जी

एहसास है मुझे .....

एहसास है मुझे,
वह दर्द जो तूने जिया ..
वह जख्म जो तुझे ...
दुनिया ने दिया।

★★★★★★


अनछुए एहसास ....


एहसास मरते नहीं,
जिंदा रहते हैं सदा।
एहसास सदा देते हैं,
जीने की वजह।
मेरी हर बात को,
तेरा बिन कहे समझ लेना।
★★★★★★★

आदरणीया साधना वैद जी

अहसासों की पगडंडी...

ज़िंदगी की राहों में
अहसासों की पगडंडी पर
पैर धरती मैं
जाने कब से चल रही हूँ
चलती ही जा रही हूँ !
मेरे तलवों ने
इन अहसासों की छुअन को
खूब पहचाना है !

★★★★★★★


आदरणीया आशा सक्सेना
एहसासों की छुअन ....

यादों में बसी मीठी यादें
उनके एहसासों की छुअन
पैठ गई दिल के कौने में
अनुभवों का हुआ  जखीरा
शब्दों का साथ पा हुआ गतिमान 
वह बह चला तीव्र गति से
अभिव्यक्ति की नदिया में 
नई रचना ने जन्म लिया 
★★★★★★
आदरणीया मीना शर्मा जी
(दो रचनाएँ)
तिश्नगी ...
Image result for मीना शर्मा
तेरे अहसास में खोकर तुझे जब भी लिक्खा,
यूँ लगा,लहरों ने साहिल पे 'तिश्नगी' लिक्खा !

मेरी धड़कन ने सुनी,जब तेरी धड़कन की सदा,

तब मेरी टूटती साँसों ने 'ज़िंदगी' लिक्खा !

★ स्पंदन - विहीन !

किंतु.....
स्थान मेरा सदा ही,
तुम्हारी नजरों के दायरे में रहा,
मन मस्तिष्क में नहीं !
बेजान अहसासों के साथ,
जीना भी कोई जीना है ?
स्पंदन विहीन !!!

★★★★★

आदरणीया अनीता सैनी जी
एहसास का समुंदर ...

एहसास के समुंदर में प्रेम की कश्ती 
मझदार तक  तुम  पहुँचा, दो तो कोई बात हो|

फ़ज़ाओं में पनप रही  नेह की महक,

आशियाना हमारा महका, दो तो कोई बात हो|
★★★★★★

आदरणीया रेणु जी
तुम्हारे दूर जाने से

अनुबंध  नहीं कोई  तुमसे-
जीवन  भर साथ  निभाने  का  .
.फिर  भी भीतर भय व्याप्त  है   -
 तुम्हें  पाकर  खो  जाने  का  ;  
समझ ना  पाया  दीवाना मन –
अपरिचित  कोई क्यों  ख़ास  हुआ ?

★★★★★

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हमक़दम का अगला विषय जानने के लिए

कल का अंक पढ़ना न भूले।

#श्वेता सिन्हा














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