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रविवार, 23 जून 2019

1437....आ जाओ अलीबाबा फिर एक बार खेलने के लिये चोर चोर

सादर अभिवादन
आज रविवार को भाई कुलदीप जी को आना था
पर उनका फोन व्यस्त है
रायपुर मे पानी की धूम है
नालियाँ उफान पर है....नदी भी होगी
जब नालियों का पानी वहां पहुंचेगा

चलिए चलें आज और हमारी पसंदीदा रचना देखें

थिरके पात शाख पर किलके
मेघ मल्हार झूमे खिलके
पवन झकोरे उड़-उड़ लिपटे
कली पुष्प संग-संग मुस्काये
बूँदें कपोल पर ठिठक गयी 
जलते तन पर फिर बरस गयी


है यह, नव-प्रभात का स्पंदन, 
या है यह, प्रकृति का, इक सर्वश्रेष्ठ लेखन, 
या, खुद रचकर, इक नव-संस्करण, 
प्रकृति, करती है विमोचन! 


गर्म-ए- हवा पे बर्क़-ए जमाल खूब है
मजाक पर भी उनका ख़याल खूब है

इधर को हम ही मरे कर के ख़िदमत तो कहे
वफ़ा के नाम पर ये इंतकाल खूब है


प्रदेश में बच्चे ‘चमकी’ बुखार और लू से
बड़ी संख्या में हर रोज़ में मर रहे हैं
ज़मीनी हकीक़त से बड़ी गहराई से जुड़े नेताजी
हवाई सर्वेक्षण से स्थिति का जायज़ा
लेने का उपक्रम कर रहे हैं !


हमने साथ चलना शुरू किया था
हमने साथ रहना शुरू किया था 
धीरे-धीरे मैं अलग होता चला गया 
एक कमरा मैंने ऐसा बना लिया है 
जहाँ अब किसी का भी प्रवेश निषिद्ध है 
जो भी इसे पढ़े, कृपया इसे आरोप नमाने 
यह महज़ एक आत्म-स्वीकृति है 

चलते-चलते..
हाथ लगा गया है
एक पुराना अखबार
उलूक टाईम्स का
जब भी 
चोर चोर 
खेल रहे होते हैं 

और 
जोर जोर से 
चोर चोर चिल्लाते हैं 

चोर अब 
चालीस ही 
नहीं होते हैं 

मरजीना 
अब नाचती 
भी नहीं है 

अब बस
आज्ञा दें
यशोदा ...


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