ना किसी से जलन,
ना किसी से कोई होड़,
मेरी अपनी राहें,
मेरी अपनी दौड़
एक दिन तपिश से जी अकुला गया था
शाम में बहुत निहोरा-पाती से
बाग़ में सैर के लिए संग चले
घर से निकल कर थोड़ी दूर ही बढ़े कि
तेज आँधी शुरू हो गयी
धूल की वजह से वापसी
वापसी होते सब ठीक
अनुभव वक्त का जलन

सफलता मिलते ही सारे रिश्ते - नाते
जो अभी तक साथ थे जलन के शिकार हो जाते हैं |
सफलता के पथ पर आगे बढ़ते हुए
इस जलन को समझना जरूरी है |
नहीं हो रहा था
उसे कोई दर्द
गर्म वैक्स की पट्टियों का
घर था उसका
सब की सब
चिपकी थीं उसके जिस्म पर !
फिर भी .. कर व्यक्त नहीं पाए
निज नेह,.. मौन के मौन रहे.
कब तलक रहे जीवित आशा
मेरी, .. इतनी चुप कौन सहे?

कभी मोटापें से झूलते पेट पर जबरन जीन्स चढ़वाती है
तो कभी नृत्य कला के लिए वजन को भूल कमरे की दीवारों पर भूकम्प ...
क्या किसी से जलन होना एक नकारात्मक भावना है
जिसका अनुभव हर व्यक्ति अपनी जिंदगी में एक बार तो करता ही है।
दूं तुम्हें कैसे जलन अपनी दिखा‚
दूं तुम्हें कैसे लगन अपनी दिखा।
जो स्वरित हो कर न कुछ भी कह सकें‚
मैं भला वे गान लेकर क्या करूं?
><
फिर मिलेंगे...
अब बारी विषय की
पचहत्तरवें अंक का
विषय
पचहत्तरवें अंक का
विषय
इंसानियत
उदाहरण
या ये लिखूं की
पैसा पैसा और बस पैसा
कमाने की होड़ में
जीना भूल रहें है लोग
पर इन सब के बावजूद
आज भी इंसानियत कायम है
प्यार कायम है
और इसी वजह से चल रही है
ये दुनिया
तो बस मैं यही लिखना चाहती हूं
आदरणीय रेवा बहन की रचना
प्रेषण तिथि - 15 जून 2019
प्रकाशन तिथि - 17 जून 2019
प्रविष्ठियाँ ब्लॉग सम्पर्क फार्म द्वारा ही मान्य
आदरणीय रेवा बहन की रचना
प्रेषण तिथि - 15 जून 2019
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