जय मां हाटेशवरी.......
आज विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र.......
खुद के लिये......
एक खुशहाल भविष्य खोज रहा है......
आओ इस के लिये हम सभी......
जाति, धर्म, क्षेत्र से ऊपर उठकर.....
अपना अमूल्य मत उसे ही दें......
जिसके हाथों में हमारा भारत सुरक्षित लगे.....
अब पेश है..... आज के लिये मेरी पसंद.....
काहे हंगामा करे, रोए ज़ारो-क़तार,
आंसू के दो बूँद बहुत हैं, पलक भिगोले यार।
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मन को इतना मार मत , मर जाएँ अरमान ,
अरमानों के जाल में, मत दे अपनी जान
सारे डिब्बे चल रहे थे,
ख़ुद-ब-ख़ुद नहीं,
आगे-आगे एक इंजन था,
जो सबको चला रहा था.
प्यार की कश्ती की
पतवार देती हूँ तुम्हे !
कांच सी दुनिया ये
तुम मिले कोहिनूर से
क्या दूं बदले में ?
बस प्यार देती हूँ तुम्हे !!!

तुम्हारे आंकड़ों पर यकीन करें भी कैसे?
जहर भरा आखिर फिर खुराक क्यूँ है?
माना परिंदे छोड़े गए हैं उड़ान भरने को
नकेल से बंधी फिर इनकी नाक क्यूँ है?
खुद ही संभालो मत मांगो सहारा तुम
लहरों से डरा हुआ भला तैराक क्यूँ है?

जायजों
के
सिंहारूढ़
होने के
जयकारों में
अपनी
जायज
आवाज मिलायें
निशान
लगाये
नाजायजों को
मिलजुल
कर
आँख दिखायें
मां नमन तुम्हें, मां वंदन तुम्हें।
मां स्तुति है, श्रष्टि दयाल की।।
मां तुम भूत हो, ईष्ट अंक, अब।
अभागा कुछ न कर सका मैं।
समर्पित हो, कृति ये।
यकीन को खोना तो नहीं चाहिए ,फिर खोया क्यों ?
इतने मजबूर हालात है क्यो ?
उलझे-उलझे सवाल है क्यो ?
धन्यवाद।


