सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष
किसी की शख़्सियत का बैठ अंदाज़ा लगाना मत।
किसी के शक्ल के पीछे छिपी फ़ितरत नहीं दिखती।
निगल जाते डकारे बिन सभी अज़गर जरा बचना।
अगर है चुप समंदर तो हमें जुर्रत नहीं दिखती।

ख़ुश्क मौसम, रात रूमानी
वो खुश्क मौसम था, वो रात रूमानी थी।
वर्षों छिपा रखा था, वो बात बतानी थी।
कैसे इज़हार कर देता, जो उन्हें थी जल्दी।
चंद लफ्ज़ पड़ते कम, वर्षों की कहानी थी।

सरकार
मैंने भी उनका भ्रम दूर करना उचित
दूर करना उचित समझा और कहा-
'भाई, किसी भी व्यक्ति की पहचान
उसके व्यक्तित्व से होती है, सरकार से नहीं।'

मोबाइल
प्रशांत नाम है उनका| चल रहे थे तो एक पैर कही पड़ते
और दुसरे कही और, ऐसा लग रहा था जैसे भंग चढ़ा रखी हो|
और आँखे रक्त सी लाल मानो कई दिनों से सोया न हो,
टेबल पर आकर बैठ गए|
सुनने का कमरा
कभी-कभी क्लास का माहौल
जितना हाथ में होता है उतना ही
हाथो से बाहर भी रहता है |
बहुत सारे विवरण और किस्से
एक साथ सामने होते हैं|

जीना सरल नहीं होता
चरण कठोर धरा पर लेकिन,
शीष विषद नील अम्बर में।
मोह युक्तता, मोह मुक्तता,
एक साथ पनपे अन्तर में।
><
फिर मिलेंगे...
हम-क़दम अब बारी है अगले विषय की
उनसठवाँ विषय
क़रार
उदाहरण
तुम हो पहलू में पर क़रार नहीं
यानी ऐसा है जैसे फुरक़त हो
है मेरी आरज़ू के मेरे सिवा
तुम्हें सब शायरों से वहशत हो
किस तरह छोड़ दूँ तुम्हें जानाँ
तुम मेरी ज़िन्दगी की आदत हो
रचनाकार जॉन ऐलिया
अंतिम तिथिः 23 फरवरी 2019
प्रकाशन तिथिः 25 फरवरी 2019