।।शुभ भोर वंदन।।
अमावस्या के घोर तमस से उत्तरोत्तर विकसित
होते हुए पूर्णिमा के पूर्ण प्रकाश तक की यात्रा ही
मानव जीवन का मूल्य लक्ष्य होना चाहिए..
होते हुए पूर्णिमा के पूर्ण प्रकाश तक की यात्रा ही
मानव जीवन का मूल्य लक्ष्य होना चाहिए..
(समाचारपत्र से..)
चंद्रमा की ,सोलह कलाओं की सुंदरता देखने
लायक होती है..पर ये भी सही है..
लायक होती है..पर ये भी सही है..
चांँद का हुस्न भी जमीन से है
चाँद पर चाँदनी नहीं होती
इब्न-ए-सफी
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इस गूढ़ सत्य के साथ नजर डाले आज की लिंकों पर,रचनाकारों के नाम क्रमानुसार पढ़ें..
इस गूढ़ सत्य के साथ नजर डाले आज की लिंकों पर,रचनाकारों के नाम क्रमानुसार पढ़ें..
आदरणीया अनुराधा चौहान जी
आदरणीय विश्वमोहन जी
आदरणीय सुशील कुमार जोशी जी
आदरणीया श्रीमति अजीत गुप्ता जी एवम्
आदरणीय राजीव सिंह जी..✍
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प्रीत के सुनहरे धागों में
पिरोए भावों के सुंदर मोती
एहसासों के रंग से रंग कर
माला गुंथी मैंने अलबेली
मन के भाव इसके मोती
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खयालों में अहसासों में
पलकर पल पल पलकों में
भाव गूँथ गुंफ अलकों में
सपनों में श्वेत शुभ्र कुंद
कहावतें भी
समय
के साथ
बह जाती हैं
चिंता
चिता के
समान
होती होंगी
कभी
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अभी शनिवार को माउण्ट आबू जाना हुआ, जैसे ही पहाड़ पर चढ़ने लगे, वन विभाग के बोर्ड दिखायी देने लगे। "वन्य प्राणियों को खाद्य सामग्री डालने पर तीन साल की सजा", जंगल के जीव की आदत नहीं बिगड़नी चाहिये, यदि आदत बिगड़ गयी तो ये सभी के लिये हानिकारक सिद्ध होंगे। आश्चर्य तब होता है जब देखते हैं कि भूखे को रोटी खिलाना पुण्य कार्य है – का बोर्ड लगा होता है..
रिश्तों को समेटना दस्तूर था
तुम्हारी भेदती नज़रों का
थोड़ा लिहाज़ तो ज़रूर था
गुम हुआ नहीं अभी मौजूद हूँ
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह 'तृप्ति'..✍



