।।मांगल्यम् सुप्रभात।।
पारंपरिक खेलों की जिक्र हुई है
चलों इसी बहाने अब दोपहर भी शाम होगी
कईयों की बचपन की गर्मी की छुट्टियाँ
इन खेलों के बिना अधूरी लगती होगी ।
गिल्ली-डंडा, कंचे ,खो -खो,
इन खेलों के बिना अधूरी लगती होगी ।
गिल्ली-डंडा, कंचे ,खो -खो,
पिठ्ठू जैसे खेल हमें अपनी मिट्टी से जोड़े रखते थे और गलियों और छते तो गुलज़ार ही गुलज़ार।
इसी बहाने छूटे चीजों को फिर पकड़ ले..
अब बढते हैं शब्दों के हुनरमंदों की ओर..✍
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दिलों में ठिकाना बनाकर तो देखो
नहीं फिर सताएगी तन्हाई-ए-शब
किसी के भी ख़्वाबों में जाकर तो देखो
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मुलाकात हुई कुछ अपने जैसे
कलम से सपने उकेरने वाले
लेखकों से
उन्हें लाइब्रेरी के
हर कोने में देखा मैंने
जो खुशनसीब थे
वो पुस्तक प्रेमियों के हाथ में
सजे मिले
कुछ ऐसे भी थे..
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सोनिआ हंस भी सकतीं हैं मुग्धा भाव लिए इससे ये तो पता चलता है वह मनुष्य योनि में ही हैं। कांग्रेस हाईकमान इतना बढ़िया अभिनय और विरोधी ..
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आज भाजपा के नरेंद्र मोदी सरकार की
चौथी सालगिरह है। सालगिरह बधाई देने का दिन होता है। मैं कोई राजनीतिक व्यक्ति
नहीं हूं , न किसी पूर्वाग्रह से ग्रसित , न किसी गिरोह का सदस्य कि आरोप
प्रत्यारोप और पूर्वाग्रह की बात करूं।
चौथी सालगिरह है। सालगिरह बधाई देने का दिन होता है। मैं कोई राजनीतिक व्यक्ति
नहीं हूं , न किसी पूर्वाग्रह से ग्रसित , न किसी गिरोह का सदस्य कि आरोप
प्रत्यारोप और पूर्वाग्रह की बात करूं।
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मैं समझ सकता हूँ
तुम्हारी विवशता को
लेकिन बस कुछ हद तक
किसी का दर्द, किसी की विवशता
कोई दूसरा कहाँ आंक सकता है
लोग लगा सकते हैं बस अनुमान
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह..✍




