सादर अभिवादन।
आँधी-तूफ़ान की चर्चाओं के बाद अब विश्व-शान्ति की चर्चा ज़ोरों पर है।
2 मई को आये आँधी-तूफ़ान में भारत में जानमाल की भारी हानि हुई। इसी आँधी में एक समाचार भी उड़ गया जो 2 मई को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा विश्व के 15 में से 14 भारत के प्रदूषित शहरों की सूची से सम्बंधित था। हमारी रूचि यह जानने में केंद्रित हो गयी कि विश्व का वह 15 वां शहर कौन सा है और भारत का आला दर्ज़े का प्रदूषित शहर कौन सा है।
आपकी सेवा में उत्तर हाज़िर है -
प्रथम स्थान - कानपुर, उत्तर प्रदेश (भारत)
पन्द्रहवाँ स्थान - अली सुबह अल-सालेम (सलेम) - कुबैत
चलिए अब आपको हक़ीक़त और कल्पनालोक की सृजनमय सैर पर ले चलते हैं -

छोटे - छोटे दरवाजे
मोटी - मोटी दीवारें थीं
मेरे गाँव वाले घर में
न किसी के दिल में दरारें थीं।

बात छोटी सी है आसपास रहने वाले सभी लोगों को दिख रहा था लेकिन किसी ने उसकी व्यवस्था करवाने के लिए नहीं सोचा क्योंकि उसका बिल उनके यहाँ नहीं आ रहा था। लोग यह क्यों नहीं समझते कि जब बिजली के खपत के मुताबिक बिल वसूली नहीं होती वह कमर्शियल लाॅस कहलाता है और इसलिए बिजली के दाम बढ़ते हैं।
टिप्पणियों पर बिफरते नये शेर को देख कर पुराने हो चुके भेड़
को कुछ तो कह देना हो रहा है...... डॉ. सुशील कुमार जोशी
को कुछ तो कह देना हो रहा है...... डॉ. सुशील कुमार जोशी

समुन्दर
लिख लेने
के बाद
नदी लिखने
का मन
किसी का
होता होगा
पता कहाँ
चलता है

जिसे कोई जल्दी नही है,
पेड़ की एक डाली से दूसरी पर कूदती फाँदती
कोयल और एक ही लय जो होश संभाला तबसे
आज तक सुनती आ रही
कू कु कु कु कु कु
न जाने कितना चिढ़ाया होगा मेरी आवाज के प्रत्युत्तर
में तो कितनी बार औऱ चिढ़ के बोलती थी कु कु कु...
बस यूँ ही धीरे - धीरे
मेरी मुट्ठीयाँ खुल गयीं
और आजाद हो गयीं स्मृतियाँ
सदा के लिये
हम-क़दम के अठारहवें क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........
आज बस यहीं तक।
फिर मिलेंगे अगले गुरूवार।
कल अपनी प्रस्तुति के साथ आ रही हैं आदरणीया श्वेता सिन्हा जी।
रवीन्द्र सिंह यादव
