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सोमवार, 13 जून 2022

3423 / ज़िन्दगी के साइड इफेक्ट्स ...... और एक लेखक की व्यथा ......

 


नमस्कार !  आज पुनः सोमवार को उपस्थित हूँ  आपके लिए कुछ लिंक्स सहेज कर .......... लिंक्स सहेजना वैसे मैं पूरे सप्ताह करती रहती हूँ और कभी कभी पुराने वर्षों की पोस्ट पर भी घूम कर जो मुझे पसंद आती है वो पोस्ट सहेज लेती हूँ , अपनी प्रस्तुति में देने के लिए ........ अब ये भूमिका किस लिए तो बताती हूँ कि  सोमवार की प्रस्तुति के लिए सन्डे को  ही ज्यादातर पोस्ट सहेजी जाती हैं ....  ........ और सन्डे के क्या क्या नज़ारे होते हैं उनको पढ़िए इस पोस्ट में ..... 

सन्डे की सुबह .

सन्डे' की सुबह, 'पॉश-कॉलोनी' की

'बालकनी' में…… जो एक 

लम्बा सन्नाटा 

बिछ जाता है…… 

शनिवार की रात का 

'साइड-इफेक्ट'

साफ नज़र आता है. 

साइड इफेक्ट केवल सन्डे के ही नहीं बहुत चीज़ों के होते हैं ......... अब देखिये हम क्या सोच कर कुछ करते हैं  और क्या से क्या हो जाता है ......

ज़िन्दगी की ड्रेजिडियत


सुबह टहलने के लिए जब निकलती तब पतिदेव जागते और थोड़ी देर बाद में मेरे साथ टहलने पार्क में आते | अक्सर पार्क के दरवाजे पर  रुके रहते जब मैं चक्कर लगाते वहां तक पहुंचती तब मेरे साथ चलते | लेकिन दो चक्कर साथ लगाने के बाद जल्दी जल्दी चल कर मुझसे आगे निकल जाते | 


एक दिन उन्हें बिल्डिंग  से निकलते मैंने पार्क से ही देख लिया | सोचा आज इन्हे मजा चखाती हूँ रोज जल्दी जल्दी चल कर आगे चले जाते हैं आज इन्हे मैं तेज टहलाती हूँ |

लीजिये , हो गया न स्यापा  .......... तभी कहा है कि दूसरों के लिए गड्ढा नहीं खोदना चाहिए ..... आपके होने की सार्थकता इसी में है कि आप अपने जीवन से किसी को सहारा दे सकें ...... किसी के काम आ सकें ...... और इस बात को आप और अच्छे से जाने इस पोस्ट को पढ़ कर ..... 

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत…!


आप भी देखिए चारों  ओर…कोई मित्र, कोई  बन्धु- बान्धव, कोई पड़ोसी अकेला किसी कोने में सिसक रहा हो तो सम्वेदनशील बनिए …रुक जाइए…आपका वक्त कितना भी कीमती क्यों न हो पर किसी की जिंदगी से तो कीमती नहीं ही हो सकता…बढ़ कर हाथ थाम लीजिए और हौसले की डोर थमा दीजिए ।

 आपकी सलाह को ध्यान में रखेंगे ........ ईश्वर न करे कि ऐसा कोई वाकया सामने आये ... फिर भी यदि ऐसा कुछ दिखा तो ज़रूर कहेंगे  कि  "मैं हूँ न दोस्त "......  हमने तो आपसे वादा कर लिया ....लेकिन कुछ लोग खुद से भी कुछ वायदे करते हैं .... बस उनको निबाहने की शक्ति देना प्रभु ....... यही प्रार्थना है .... 

खुद से वादा कर


जीवन अपना सादा कर
जरूरतों को आधा कर

जुबान पर लगाम रख
यूं पार ना मर्यादा कर|


आज कल कहाँ जीवन सीधा सादा है ? ........... सबके मन आक्रोश से भरे हैं ...... धर्म के नाम पर लोग कितने उन्मादी हो गए हैं कि सीधा सदा इंसान समझ ही नहीं  पाता कि हो क्या रहा है ......  पढ़ कर मनन कीजियेगा इस पोस्ट पर .... 


 उन्होंने झूठा आरोप लगायाउसकी पुष्टि में कुछ झूठ और बोलेवे झूठ बोलते ही गयेबोलते ही गये और मात्र कुछ ही घण्टों में उनका झूठ स्थापित हो गया। जो लोग नूपुर शर्मा के पक्ष में खड़े थे उनकी भाषा में भी स्थापित झूठ का प्रतिबिम्ब दिखाई देने लगा |


अब झूठ  स्थापित हुआ या नहीं ये तो क्या कहें ........ लेकिन एक बात से तो मन प्रफुल्लित है .....इस खबर को पढ़ कर हम सभी को हिंदी भाषा के लिए गौरवान्वित होना चाहिए .... 


न्यूयॉर्क. संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने बहुभाषावाद(multilingualism) पर एक उल्लेखनीय पहल की है। भारत के लिए यह गौरव की बात है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा(UNGA) के कामकाज में अब हिंदी भाषा को भी जगह मिलेगी। UNGA ने 10 जून को इस दिशा में एक उल्लेखनीय पहल करते हुए  बहुभाषावाद (multilingualism) पर भारत की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव को पारित कर दिया। यानी अब  UNGA के कामकाज में हिंदी के अलावा अन्य भाषाओं को भी तवज्जो मिलेगी। बता दें कि अरबीचीनीअंग्रेजीफ्रेंचरूसी और स्पेनिश संयुक्त राष्ट्र की आफिसियल लैंग्वेज हैंजबकि अंग्रेजी और फ्रेंच UN सेक्रेट्रिएट की कामकाजी भाषाएं हैं।


हमारे देश के नागरिकों के मन मस्तिष्क में भले ही हिंदी का परचम न लहराए , विदेशों में और बड़े बड़े मंच पर तो हिंदी अपने झंडे  गाड़ रही है ...... ... 
मेरे पास बी० ए०  तक हिंदी विषय रहा है ...... और तब पढ़ा था कि एक कहानी कार केवल तीन कहानियाँ लिख कर ही बड़े साहित्यकारों में शामिल हो गए थे .......  नाम तो आपको  पता ही होगा ........... जी हाँ ..... चन्द्र धर शर्मा गुलेरी .......  उनकी जग  प्रसिद्ध कहानी ....... उसने कहा था ...... " तेरी   कुडमाई   हो गयी "  विशेष वाक्य ....... ब्लॉग पढ़ते हुए मुझे इसी शीर्षक की एक लघु कथा पढ़ने में आई ...... 

बहुत पुरानी बात नही है , होगी तब की ,जब आदम -हव्वा कुछ समझने लायक भी नही हुए होंगे ।। रोती लड़की को देख ,लड़के ने पूछा "रोती क्यों है इतना  ?" 

लड़की ने सुबकते हुए कहा "मेरी माँ चली गयी  उन सितारों के पास ,"😢

ओह!लड़का सुन कर  कुछ परेशान हुआ , फिर बोला ," सुनो! अब जब भी रोना आये  तो मेरा नाम लेना , रोना बन्द हो जाएगा |

 ये  प्रेम भी क्या शय है जो किसी को किसका कर्ज़दार बना देता है ......  और इस प्रेम की खातिर क्या क्या ख्वाहिश होती है और कैसी कैसी   मन्नतें .....  मन्नतें ब्लॉग पर ही जा  कर पढ़ें ......... घर पर ताला लगा है ..... और मैं  घुस - पैठ  नहीं करना चाहती ..... 

प्रेम का एक भाव ये भी है जहाँ सारे भाव पीछे छूट  जाते हैं ...... 

माँ


माँ भर देती है डिब्बे में 

पूरियाँ,भाजी और थोड़ा-सा अचार,

रख देती है थैले में पानी के साथ 

और पकड़ा देती है मुझे जाते-जाते. |


लीजिये ..... हम तो यहाँ प्रेम की बात कर रहे हैं और लोग हैं कि चमचा बनाने की बात ले कर बैठे हैं ........ अब समझ नहीं आता कि दुष्यंत साहब के शेर को ले कर लोग इतने संजीदा क्यों हैं कि एक पत्थर उछालने की बात कही थी आसमान में ....... यहाँ तो बारिश हो रही ...... पढ़िए


कौन कहता है कि छलनी को फिर से चमचा नहीं बनाया जा सकता .....


  अब कोई चमचा बने या नहीं  लेकिन आज की तारिख में  सब लेखक बन रहे हैं और  खुद को व्यथित भी कर रहे हैं .....नहीं विश्वास ?  चलिए हम पढवा रहे हैं ......... 


एक लेखक की व्यथा --

फिर एक दिन हिम्मत करके 

पत्नी के गुल्लक से पैसे निकाले, 

और कर दिए हिम्मत लाल प्रकाशक के हवाले।  

सीना २४ इंच से बढ़कर २५ इंच का हो गया, 

जब छपकर हाथ में आ गई किताब। 

२४ इंच का सीना  बस २५ इंच हुआ ? हमें तो लगा कि यहाँ भी ५६ इंच से कम क्या बात होगी ........ वैसे व्यंग्य तो ये भी ज़बरदस्त है जो लोग २४ इंच का सीना ले कर लेखक बने हैं वो भी विरोध में खूब बोलते हैं .....😅😅

और हम हैं  कि विरोध की परवाह नहीं करते ......... अब भले 

ही कोई कह दे कि आप ५ की जगह १० लिंक लगा देती हैं ......... अब क्या करें ? जो पसंद आता है सब समेट लेते हैं ...... फिर भी बहुत कुछ रह जाता है हर बार ....... तो भई गुजारिश है कि   बंदिश न लगाना ..... कभी ये भी हो सकता है कि एक ही लिंक ले कर प्रस्तुति लगा दूँ... 😆

चलते चलते  अभी अभी ज्ञान मिला कि हम सब  कवि हैं जो कुछ भी करते हैं बस कविता हो जाती है ...... 

कविता ही तो है !

कहते और कहते रहने का प्रयास ,

तुम हम में बसी 

आत्मा को जीवित रखने का प्रयास ,

और नहीं तो क्या ,

कविता ही तो है !!

आप लोगों का कुछ ज्यादा ही समय लेते हुए ......... अब समाप्त  कर रही हूँ ........ मिलते हैं अगले सोमवार को कुछ नए लिंक्स के साथ ..... ..... तब तक के लिए ..... नमस्कार 


संगीता स्वरुप 




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