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सोमवार, 6 जून 2022

3416 ...../ चलो रोपते हैं एक पौधा / सांसों का सौदा .......

 नमस्कार ! आज  पुनः सूचना  लगा रही  हूँ ......... जिन ब्लॉगर्स  को यदि जानकारी नहीं है वो ध्यान दें ..... 

रविन्द्र प्रभात जी एक जाने माने ब्लॉगर रहे हैं । उन्होंने परिकल्पना की शुरुआत  की थी । प्रति वर्ष किसी न किसी ब्लॉगर को अलग अलग विधा में अलग अलग पुरस्कार भी मिलते रहे हैं । अब उनकी योजना है कि एक परिकल्पना कोश बनाया जाय जिसमे ब्लॉग और ब्लॉगर्स के नाम दर्ज़ हों , यानि कि ऐसा कोश जहाँ सभी ब्लॉगर्स  का  अता- पता मिल जाये । रश्मि प्रभाजी  को ब्लॉग्स के लिंक इकट्ठे करने का काम सौंपा गया है । उनकी तरफ से ये सूचना मैं यहाँ लगा रही हूँ -


परिकल्पना कोश के निर्माण के प्रथम चरण में 
पिछले तीन दशक में ब्लॉग पर शानदार उपस्थिति दर्ज कराने वाले ब्लॉगर बंधुओं को रेखांकित करने का कार्य शुरू करते हैं।

इसमें शामिल होने के लिए कृपया अपने नाम के साथ ब्लॉग का नाम,कब बनाया, उद्देश्य क्या था लिखकर और साथ में ब्लॉग के किसी खास पोस्ट के साथ rasprabha@gmail.com पर यथाशीघ्र भेजें ।

यहाँ कुछ बातें स्पष्ट कर दूँ कि

 1 -ये कार्य ब्लॉग्स को एक जगह एकत्रित करने का है । 
2- पोस्ट जो भेजी जाय वो छोटी होनी चाहिए । यदि लम्बी पोस्ट है तो केवल लिंक भेजें । 
3 - प्रयास करें कि 10 दिन के अंदर ही अपने ब्लॉग के बारे में जानकारी दे दें । 
यदि किसी को और कुछ जानकारी चाहिए तो कमेंट में पूछ सकते हैं । जवाब भी आपको  अगले दिन यहीं कमेंट में मिलेगा । 

आशा है आपमें से बहुत से ब्लॉगर्स ने अपने ब्लॉग  की जानकारी दे  दी होगी ........ 

अब चलते हैं आज की प्रस्तुति पर ......... देखते हैं कुछ चुने हुए लिंक्स .......... वैसे आज कल ब्लोग्स  पर पोस्ट कुछ कम आ रही हैं ........ नए  ब्लॉगर्स से उम्मीद   बंधी  थी लेकिन वो भी तो अब पुराने हो गए न .........लेकिन एक अच्छी बात हो रही है की कुछ पुराने ब्लॉगर्स  अपने  ब्लॉग पर अपनी पोस्ट  डाल रहे हैं और निरंतर सक्रीय हैं ........ब्लॉग्स पर भ्रमण कम है लेकिन अपने ब्लॉग पर  पोस्ट  डाल  रहे हैं .......... इसी सिलसिले में  संध्या शर्मा  जी  ने  ब्लॉग  पर    पंख  फैलाए हैं और लायी हैं बेहतरीन .....

परवाज़...


वो तन्मयता से मेरे पांवों को 

महावर से सजाना तुम्हारा

मेरे आंचल को सलीके से संवारना

हर पूजन अनुष्ठान में

मुझे सम्मान देकर

अनुगामी बनना तुम्हारा

संध्या  शर्मा जी की ये रचना चित्रों पर आधारित है ...... अर्थात  चित्रों को शब्द का ताना बना  पहनाया गया है ......... लेकिन ये शब्द क्या क्या भाव रखते हैं इनको जानना है तो पढ़िए रेखा जी की रचना ..... 

मैं क्या हूँ?

मैं शब्द हूँ,

उमड़ता हूँ दिमाग में

कभी कल्पना से,

कभी साक्षी बनने से

कभी तो भोक्ता भी होता हूँ,

लीजिये शब्दों ने कह दिया  कि  क्या क्या भाव रखते हैं ..... लेकिन  लोगों के मन में क्या क्या भाव रहते हैं इनसे सावधान होना ज़रूरी है ..... और सोशल मिडिया पर क्या क्या होता है ज़रा एक निगाह डालें .... 
 एक भाई साहब ने मुझे फेसबुक पर मित्रता निमंत्रण भेजा | जर्मनी में ह्रदय रोग के डॉक्टर हैं और पूरे जर्मनी में इनको मित्रता के  लिए सोशल मिडिया पर कोई नहीं मिला और मुझे मित्र निवेदन भेज दिए हैं | इनके हजारो मित्रो में ज्यादातर अफ़्रीकी और दो चार  भारतीय लोग ही दिख रहें हैं |  ये किसी अफ़्रीकी देश में  बना फर्जी प्रोफ़ाइल हो सकता हैं | जो  लॉटरी  जीताने या चाचा की संपत्ति दान करने जैसे कांड के लिए बना होगा | 

फेक प्रोफाइल की बातों  से ज़रा  बच  कर रहिये ....... क्यों कि इनके द्वारा फैलाया हुआ भ्रम मन में कडवाहट ही भरता है ....... आज कल न जाने हमें क्या क्या परोसा जा रहा है ...... फिर भी बहुत कुछ है जो नहीं मिलता ....... और इसकी जानकारी दे रहे हैं डॉक्टर दाराल ..........

विकास ने लोगों की जिंदगी में, कर दिया ऐसा परिवर्तन,

कि तमाशा देखती गूंगी भीड़ में, वो मददगार नहीं मिलते। 

लीजिये भाई ..... यहाँ तो लोग नहीं  मिलते और आज कल बच्चों  की फरमाईश  है  कि उनको क्लोन चाहिए .........  एक रोचक बाल कथा  डॉक्टर जाकिर  रजनीश  लाये हैं ...... 


बाल विज्ञान कथा : मेरा क्लोन बना दो


रवि हैरान था। यदि वह संसार का आठवां आश्चर्य भी देख लेता, तो शायद उसे इतनी हैरानी तब भी नहीं होती, जितनी सामने के दृश्य को देख कर हुयी थी। ये ... ये ... कहीं भूत तो नहीं?

और रवि का सारा शरीर भय से कांप उठा। डर के कारण उसके शरीर के रोएं खड़े हो गये और आवाज जम गयी। लेकिन इससे पहले कि वह चीखता, उसके पापा सामने आ खड़े हुए।

 देर आये दुरुस्त आये ....... एक बच्चा तो सीख ले लेता है लेकिन हम बड़े कब सीखेंगे ...... वैसे नहीं सीखे तो नुक्सान हमारा ही है .....  नूपुरं आह्वान कर रही हैं ......... 


चलो रोपते हैं एक पौधा । उम्मीद का ।
बरसों बाद जिसकी ठंडी छांव में बैठा
कोई थका-हारा हो कृतज्ञ देगा दुआ ।
शायद वो भी फिर रोपेगा एक पौधा  

कितनी अच्छी बात कही है  कि आज हम एक पौधा रोपेंगे तो हो सकता है आगे की पीढ़ी भी इस बात का ख्याल करें ......... लेकिन क्या करें हर एक के मन में तो स्वार्थ ने जगह बना ली है .....  जिज्ञासा जी इसी बात को इंगित कर रही हैं ....... 



रो रही है बेल बूढ़ी देखकर सब

सात पुश्तों से खड़े बागों का सौदा 


दूध जिसको था पिलाया लिपटकर

कर गए हैं वो ही औलादों का सौदा 


 अब जब  सौदे की बात है तो देखिये की गरीबी में बच्चों के श्रम का कैसे सौदा होता है ....... सरकारी आंकड़े इकट्ठे होते हैं लेकिन  गरीब कैसे ज़िन्दगी यापन करे ?  एक लघु कथा  मीना भारद्वाज  जी की .......

“सर्वे”


चालक ने पूर्ववत अपना काम करते हुए कहा - “आप क्या करेंगी जानकर …, मेरी उम्र अट्ठारह साल है । आज  गली-गली कुछ लोग फ़ाइलें लिए घूम रहे हैं । कहते हैं -  “बालश्रम अपराध है ।”


ऐसे ही हर एक के जीवन में उथल पुथल चलती रहती है ....... लेकिन ज़िन्दगी का एक ही साश्वत सत्य है की जो आया है उसे जाना है ....... इसी भाव को अनुराधा जी ने शब्द दिए हैं .....

जीवन चक्र




अब मुझे लग रहा कि लिंक्स का चक्र भी पूरा हो गया है।
चलते चलते एक और बेहतरीन लिंक  जो पर्यावरण से संबंधित है ......


सच तो यह है कि 
हमने 
घर के भीतर से 
निकलने और लौटने का रास्ता 
अपनों को ही काट कर बनाया है----

 .......... तो अब यहीं विराम ........ मिलते हैं अगले सोमवार को  कुछ मेरी पसंद के लिंक्स के साथ ........... तब तक के लिए  नमस्कार . 

संगीता स्वरुप . 


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