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सोमवार, 12 जुलाई 2021

3087 ------- रथ यात्रा और इस ब्लॉग का जन्मदिन ..........

  19 जुलाई 2015 को  रथ  यात्रा  के दिन ही इस ब्लॉग ( पाँच लिंकों का आनन्द ) का जन्म हुआ था । इसलिए प्रतिवर्ष  हिन्दू पंचांग के अनुसार रथ  यात्रा के दिन  इस ब्लॉग का जन्मदिन मनाया जाता है । आज का यह विशेष दिन मेरे हिस्से आया है , अतः जन्मदिन मनाने की ज़िम्मेदारी मेरे हिस्से आ गयी है । इसका निर्वाह करने में  श्वेता के सहयोग के लिए स्नेह और आशीर्वाद । (धन्यवाद वो लेगी नहीं )

सर्वप्रथम  आज  रथ - यात्रा   का दिन है तो भगवान जगन्नाथ को स्मरण करते हुए , आप यहाँ पढ़ सकते हैं ।



 यात्रा के साथ साथ आज मैंने अपने मंच के लोगों से आग्रह किया है कि सब तैयार हो जल्दी मंच पर पहुँचें । आखिर मेज़बान हैं ।  जी हाँ  आज इस मंच का जन्मदिन मनाने के लिए कुछ मेहमान आमंत्रित किये हैं । चर्चा मंच के सभी चर्चाकार  आज हमारे अतिथि  हैं  ।  साथ ही मेरी नज़र में जो   विशेष टिप्पणीकार हैं उनको भी मेहमान के रूप में बुलाया है । यूँ कुछ चर्चाकार भी बहुत अच्छे पाठक और टिप्पणीकार हैं ,लेकिन आज वो मंच पर उपस्थित हैं  ।  इसलिए  उनके अतिरिक्त कुछ को मेहमान के रूप में आमंत्रित किया है ।

मेज़बान के रूप में  सबसे पहले मैं ही उपस्थित हूँ , अगवानी करनी है न सबकी । 
आज जगन्नाथ जी का दिन सब खुशी में सराबोर , बस मेरे मन में चल रही कुछ बेचैनियाँ ..... पढ़िए ----




ओह , देखिए कैसे दौड़ती भागती यशोदा जी पहुँच गयीं हैं और पीछे पीछे दिग्विजय जी आ रहे हैं । तो पहले मिलते हैं यशोदा जी की धरोहर से --अरे वाह ! आज तो यशोदा अपने मन  की उपज ही ले आई हैं ..... वक़्त  की पाबंद .... अज वक़्त  की बात कर रही हैं ...




दिग्विजय जी भी  पहुँच गए हैं , ज़रा टैक्सी का हिसाब किताब कर रहे थे --- 
अरे वाह !  कितनी सुन्दर कथा लाये हैं आप .... आज रथ यात्रा के  दिन 

भगवान शालिग्राम कथा...




अरे वाह विभा जी  कितनी समय की पाबंद हैं .... मज़ा आ गया आपको देख कर । आपका तो स्नेह और आशीर्वाद ही सबके लिए काफी है --- वैसे आप क्या लाईं हैं - आप तो ज़रूर कुछ सीख ही लायीं होंगी ..... काश सब आपकी बात समझें .... हिन्दू संस्कृति में वृक्ष का महत्त्व बता रही हैं ...




कहा था श्वेता से मैंने कि सहायता तो बहुत हो गयी ज़रा समय से पहुँच जाना , वैसे आती ही होगी .... लीजिए आ गईं अपने सारे असबाब के साथ  --अरे थोड़ा ठीक से , न जाने कहाँ रहता है ध्यान  , कहाँ डूब  उतरा रही हो  ? 
चलो थोड़ा काम पर ध्यान दे लो ...... ओ  

कुलदीप जी और रविन्द्र जी तो बहुत ही व्यस्त रहते । देखते हैं कि कब तक पहुँचेंगे इस बीच दिव्या और पम्मी आ गईं हैं  तो ज़रा उनको थोड़ा काम बता देती हूँ तब तक पम्मी से मुलाकात कीजिये --अरे क्या हुआ ? आज के दिन ये क्या हाल बना रखा है ?  चलो कह ही डालो सब ----
 
और हाँ दिव्या ज़रा ध्यान रखना कि मेहमान आने शुरू  होते ही  बता देना और उनका स्वागत अच्छे से करना ---दिव्या तुम क्या लायी हो आज ? -- ज्यादा कहानी न सुनाओ ...... जल्दी  बताओ आखिर है क्या ? ..... अच्छा अच्छा कहानी लायी हो ....  बढ़िया .... 


अहा ! कुलदीप जी पहुँच गए हैं । असल में रविन्द्र जी  तो  मेज़बान भी हैं और मेहमान भी , तो ठीक ही है पहले सारे मेज़बान तो पहुँचें । कुलदीप जी तो आज  कुछ खेल ले कर आये हैं .... जन्मदिन पर सबको दिखाना चाहते हैं ..... 




आखिर आ ही गए रविन्द्र जी भी । ज़रा बताइए कि मेहमान कब तक पहुँचेंगे ?   आपको तो पता होगा न ? खैर पहले आपका पिटारा देखें .... क्या बात ! रविन्द्र जी आप तो सबकी सेहत का ख्याल रखे हुए हैं .....एक नयी विधा  वर्ण पिरामिड  के साथ लाये हैं ...


रविन्द्र जी ज़रा पता तो करिए कि कब तक पहुँच रहे हैं  हमारे मेहमान ?  जी , शास्त्री जी को तो आधा घंटा देर से समय बताया था । सब आ जायें तब ही मुख्य अतिथि आएँ तो अच्छा लगता है । 

लग रहा है सबसे पहले अनिता जी आ रही हैं । सारे सदस्य तैयार हैं न मेहमानों के स्वागत हेतु ? 
स्वागत अनीता जी ...... कुछ परेशान लग रही हैं ..... थोडा मार्मिक स्थिति से अवगत करा रही हैं  और  कह  रहीं हैं कि ----




कामिनी और मीना जी साथ साथ , वाह , आनंद ही आ गया । 
आपकी पोटली में क्या क्या है ? 
कामिनी पहले आप दिखाइए । अरे आप तो अपनी ही तलाश  करती आ रही हैं .....




मीना जी भी कुछ चुपके चुपके लाईं तो हैं  , देखते हैं क्या है ? अरे दिखाईये तो  ..... किसकी चिट्ठी है ???????????????  आप भी न ....




दिलबाग जी नहीं आये अभी तक । दया ज़रा पता करो ,ओह दया नहीं रविन्द्र भाई ज़रा पता करिए  । अच्छा शास्त्री जी के साथ आ रहे हैं । ये अच्छा किया । 

तब तक ज़रा टिप्पणीकारों को फोन करो । कहाँ हैं ? 

रेणु  पहुँच गयीं हैं । स्वागत रेणु । आपके आते ही बहार आई ...... आप तो क्षितिज के  संग  बादल लाईं हैं । बहुत गर्मी है , सच्ची । कुछ बादल दिखे .... बस जोर से बरस भी जाएँ .... 

सुधा जी स्वागत आपका ,नाम के अनुरूप आपकी टिप्पणियां भी  अमृत का काम करती हैं । नई सोच में क्या कह रही हैं देखते हैं ---  आप भी प्रकृति की ही चिंता कर रहीं हैं  -

वाह , जिज्ञासा जी क्या बात है ! जिज्ञासा की जिज्ञासा तो आज सबकी जिज्ञासा हो रहीं । लेकिन मन बहुत उद्वेलित हो रहा है , रोज़ रोज़ ऐसी घटनाएँ देख कर .... सच कह रही हैं आप , 



लीजिए हमारे मुख्य अतिथि डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री
 दिलबाग जी के साथ पहुँच गए हैं । बहुत बहुत स्वागत है । 

देखें दिलबाग जी  क्या कह रहे हैं --- अरे !!  ये क्या कह रहे हैं ??????? नहीं हम तो यहीं स्वागत करेंगे  .... 

     
  
मुख्य अतिथि  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्रीवरिष्ठ चिट्ठा कार रहे हैं । अनवरत अपने ब्लॉग के साथ चर्चामंच को चलाना सरल कार्य नहीं है । इसके लिए आपको हम सबकी तरफ से साधुवाद --- 
आपकी पुरानी रचनाओं में से एक रचना लायी हूँ , सब उसका आस्वादन करें  , एक बेहतरीन सोच और सकारात्मक उर्जा के साथ  शास्त्री  जी की एक उम्दा रचना .... 





और अब सभी अतिथियों और इस मंच के सभी साथियों से  तथा  अपने पाठकों से निवेदन है कि जन्मदिन के उपलक्ष  में वीडियो  चला कर जन्मदिन का आनंद लें । तत्पश्चात थोडा जलपान लें  अनुगृहित  करें . 

ये मंच इसी तरह साल दर साल अनेक आयाम तय करता रहे ।  यही शुभकामनाएँ हैं ....
















आज सभी मेहमानों का धन्यवाद करते हुए  विदा लेते हैं ........ 

आप सभी पाठकों का धन्यवाद ....... आप हैं तो ये मंच है ...... 

मिलते हैं अगले सोमवार को फिर इसी मंच पर ..... 

संगीता स्वरुप 
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