नमस्कार .... आज लिंक लगाने से पहले हम अपने उन सभी साथियों का अभिनन्दन करते हैं जो कोरोना महामारी से जीत कर आये हैं .... कुछ साथियों की ख्वाहिश है कि ये सेनानी अपने कठिन समय के अनुभवों को साझा करें जिससे अन्य लोग भी इससे दो - दो हाथ करने को तैयार रहें ... और अपने मनोबल से हर हाल में उसे हरा सकें ... पिछली पोस्ट में आपने संध्या शर्मा जी के अनुभव का लिंक पढ़ा होगा ... ऐसे ही यदि हमारे अन्य ब्लॉगर साथी भी साझा करें तो बहुत से लोग लाभान्वित हो सकते हैं ....
आज कल ज्यादातर देखा जा रहा है कि कोरोना से जीत हासिल करने के बाद अचानक ही हार्ट अटैक से मृत्यु हो जाती है . इस पर आज का ये विशेष लेख ..... जो लोग जानकारी लेना चाहें वो इस लिंक पर जा सकते हैं ....
कोराना संक्रमण के दौरान और उससे उबरने के बाद भी रोगियों में डी-डाइमर प्रोटीन की अधिकता देखी जा रही है, जिसके कारण उनमें हार्ट अटैक और हार्ट फेल जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। हाल के दिनों में अनेक बड़े चिकित्सक, पत्रकार, कलाकार और राजनेता भी इसके शिकार हुए हैं। इसमें सबसे ताज़ा मामला जाने माने न्यूज़ एंकर रोहित सरदाना का है। वे कोविड संक्रमण से मुक्त होने के बाद हार्ट अटैक का शिकार हो गये थे। तो आइए जानते हैं कि क्या हैं डी-डाइमर प्रोटीन क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और हम कैसे इससे बच सकते हैं।
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जीवन में न जाने कितने प्रश्न और उनके उत्तरों की तलाश ..... फिर भी बहुत से प्रश्न अनुत्तरित ही रह जाते हैं ....
कितनी ही कड़वाहट पी कर भी इंसान नीलकंठ नहीं बन पाता ... पढ़िए जिज्ञासा जी की रचना .....
मेरी ही कमी, उन्हें आग उगलने
का मौक़ा दे गई
मेरी शालीनता ही कटघरे में खड़ी हो गई
निजी जीवन और सार्वजनिक
दैहिक, दैविक, भौतिक,
सब मेरे पास था
पर कहीं कुछ ज़रा उदास था |
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ज़िन्दगी में कहीं कोई पल उदासी भरा है तो कहीं आशा की नन्ही किरण भी दिखती है .... और ऐसी ही आशा की किरण फैला रही हैं अभिलाषा जी ....
बीत जाएँगी ये भी घड़ियाँ
डर-डर के मत जीना है
गहन तिमिर की भले हो बेला
अमृत आस का पीना हो।
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आलोक सिन्हा जी के ब्लॉग पर जा कर जैसे मन वहीं स्थिर हो गया .... न जाने कितनी बार इस रचना को पढ़ा ....कुछ आत्मसात किया ..... और अपनी संस्कृति की धरोहर को याद किया .... सुन्दर विचारों का समन्वय ....... और एक विश्वास कि तुम कितना ही मिथ्या कहो लेकिन हमारे आदर्श और नैतिकता हमेशा रहे हैं और रहेंगे ....... अलोक जी आपका ब्लॉग पढने फिर आऊँगी ..... बहुत कुछ खाद्य सामग्री मिलेगी हमारे मस्तिष्क को ....
सूक्ष्म मलिन से खद्योतों को
सूक्ष्म मलिन से खद्योतों को दिनकर कहने वालो
गहन अमावस में पूनम की छटा निरखने वालो ,
तुम कितना जग को भरमाओ ,
कागों की संस्कृति अपनाओ ,
लेकिन सच्चाई का भू पर मरण नहीं होगा |
नैतिक मूल्यों का तिलभर भी पतन नहीं होगा |
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और जब हम बात नैतिक दृढ़ता की करते हों तो वहां आस्था और विश्वास स्वयं ही उपस्थित होते हैं .....
और यूँ ही तो ये मुहावरा नहीं बना न कि ---
जितेन्द्र माथुर जी अधिकतर उपन्यासों की या चलचित्रों की समीक्षा करते हैं .... आज इन्होने अपने अनुभवों को लिखा है जो धर्म और आस्था से जुड़े हैं ....
मेरे लिए तो वह लगभग अनजाना-सा छोटा मंदिर ही संसार का सबसे अधिक शांतिपूर्ण स्थान सिद्ध हुआ । इसलिए धीरे-धीरे मैंने समझ लिया कि सन्मार्ग पर चलो तो ईश्वर कहीं और नहीं, अपने भीतर ही है और तनमन को शांति छोटे लेकिन भीड़भाड़ तथा शोर से रहित स्थानों पर ही मिलती है, भीड़भरे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर नहीं । जहाँ मान और पहचान धन को मिले, मन को नहीं; वहाँ क्या जाना ?
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आज बस इतना ही ...... आशा है आपको इन लिंक्स पर जा कर निराशा नहीं होगी ..... आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार रहेगा जिससे हम अपनी त्रुटियों में संशोधन कर सकें .
अंत में बस एक सलाह ...... घर पर रहें ....... सुरक्षित रहें ...
संगीता स्वरुप