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शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2020

1680...आपके लिखने ना लिखने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है...

सादर अभिवादन। 

आज महाशिवरात्रि है. 
हार्दिक शुभकामनाएँ. 

शिक्षा को बेधड़क अपनाया 
सबका जीवन बेहतर करने,
न जाने कितने पूर्वाग्रह पाले हैं 
कि स्त्री-शिक्षा से लगे डरने।  
#नारी मुक्ति आंदोलन 
-रवीन्द्र 

आइए पढ़ते हैं आज की कुछ पसंदीदा रचनाएँ-


 मेरी फ़ोटो

साँसें भी थक चली ,पग भी थम गये
मंजिल का उधार अभी बाकी है

*तन* तो मिट्टी हुआ भस्म यूँ बन गया
एक पेड़ का उधार अभी बाकी है

  

 
यूँ बूँद कोई, कभी छलक आए,
चले पवन कोई, बहा दूर कहीं ले जाए,
बहकी, कोई बात करूँ!



कोरी, प्यारी, सुंदर सी किताब लीजिये
स्याही मिले तो फिर खिजाब लीजिये
घोलने को आंसुओं का सैलाब लीजिये
खुद से कुछ सवालों के जवाब लीजिये



 

जब हम घर पहुंचे तो मेरी नन्द सारी घटनाक्रम को सुनकर मुझे पकड़कर रोने लगी और बोली -" भाभी आप की वजह से सोनाली पर से एक खतरा टल गया और उसकी जान बच गईमैंने कहा - " आप गलत बोल रही हैं ,हमारी किस्मत अच्छी थी कि सोनाली हमारे साथ थी ,उसकी वजह से  हम सब की जान बचीहम सभी ने ईश्वर का धन्यवाद किया। उस दिन यकीन हो चला था कि -" आस्था में बहुत शक्ति होती हैं " मेरी एक गुहार -" गुरुदेव ,मेरी सोनाली की रक्षा करना " इतना सुन गुरुदेव ने हम सभी को बचा लिया था। 



"बिल्कुल सही कहा आपने। लेकिन ऐसा क्यों है, कोई बताएगा?" जब उन्हें कहीं से जवाब मिलता नहीं दिखा। तो बोले, "दरअसल पूरे देश में बिहार एकमात्र राज्य है जो अपनी जीडीपी का साढ़े पांच प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करता है। लेकिन यह खर्च शिक्षकों के वेतन नहीं ट्रेनिंग और अन्य मदों में होता है।"


 


आप

लिख रहे हैं
लिखते रहें

आपके
लिखने
ना लिखने से
किसी को
कोई
फर्क
नहीं पड़ता है



हम-क़दम का नया विषय



आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगे अगली प्रस्तुति में। 

रवीन्द्र सिंह यादव  

11 टिप्‍पणियां:

  1. आज महाशिवरात्रि पर्व है। महादेव की पूजा कृषि कार्य में एकाग्र भाव से लगना भी है । शिव के पास जितने साधन हैं, वे कृषि से संबंधित हैं । शीश पर जल कृषि की सिंचाई, वाहन नन्दी तथा त्रिशूल खेत जोतने वाले बैल एवं हल, गले में सर्प फसलों की रक्षा के लिए प्रयोग में आने वाली कीटनाशक दवा, शीश पर चन्द्रमा ऊर्जा के रूप में प्रयोग होने वाले उर्वरक के सूचक हैं । इन पदार्थों की समुचित उपलब्धता से खाद्यान्न के रूप में शक्ति मानी जाने वाली पार्वती ( अन्नपूर्णा ) से सम्बन्ध का आशय है ।
    अतः वासन्तिक मौसम में शिवरात्रि पर महादेव की आराधना के निहितार्थ पर दृष्टि डालने से स्पष्ट होता है कि भगवान शिव कृषिसंस्कृति के पोषक हैं । जीवन के आधार हैं , इसलिए सभी को प्रिय हैं।

    सुंदर संदेश देने वाली भूमिका के साथ रचनाओं का संकलन भी आपने क्या खूब किया है। आप सभी को शिवरात्रि पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ।

    हम भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप को कुछ इस प्रकार भी समझ सकते हैं। उनका दायाँ भाग कर्म पथ और बाया भाग भाव पक्ष है, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की तरह।

    नारी शिक्षा पर आपकी भूमिका विचारणीय है, क्योंकि संपूर्ण परिवार और सामाजिक संबंधों को निभाने में नारी की ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
    और संयुक्त परिवार में बिखराव का मुख्य कारण भी नारी ही होती है।
    पता नहीं एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था है कि विवाह के पश्चात हम दो पति-पत्नी और हमारे बच्चे यह भावना जागृत हो जाती है।

    जवाब देंहटाएं
  2. क्या पंक्तियाँ हैं, और अगर लिखने से पड़ने वाले फर्क़ की बात है तब यह अब तक जितना पड़ता था भविष्य में उतना भी नहीं पड़ेगा क्योंकि बहुत जल्द कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दौर आने वाला है।

    जवाब देंहटाएं
  3. व्वाहहहहहह....
    बेहतरीन प्रस्तुति...
    सादर आभार...

    जवाब देंहटाएं
  4. महज लिख डालने से अगर कुछ घटित हो जाता, तो युगों पहले ग्रन्थ, महाग्रंथ, शास्त्र, महाशास्र आदि लिखे जा चुके हैं, फिर भी मतिछिनन्ता, मति भिन्नता व सामाजिक विषमता व्याप्त है, और सिर्फ मौजूद ही नहीं फल फूल भी रही है।
    आपने अपनी लेखनी से सटीक व्यंग्य किया है मानव जाति पर। ये प्रबुद्धजन हैं जो भटकते हैं आज भी न जाने किस सोच में ।
    शुभकामनाएं ....आदरणीय जोशी जी।
    समस्त रचनाकारों व मंच से जुड़े सभी गुणीजनों को शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं ।

    जवाब देंहटाएं
  5. खूबसूरत प्रस्तुति रविन्द्र जी । महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँँ .

    जवाब देंहटाएं
  6. सुंदर प्रस्तुति सर ,मेरी रचना को मान देने के लिए हृदयतल से आभार ,सादर नमस्कार आपको
    आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  7. शानदार संकलन उम्दा प्रस्तुति
    महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं....।

    जवाब देंहटाएं
  8. Thanks for the information you brought to us. They are very interesting and new. Look forward to reading more useful and new articles from you.

    जवाब देंहटाएं

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