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रविवार, 5 मई 2019

1388....नयी सरकार लग रहा है कुछ कर दिखायेगी

सादर अभिवादन....
चला गया फ़ानी
रायपुर से..
रायपुरियन्स की आदत हो गई है
मई और जून माह में..
आँधी-तूफ़ान झेलने की...
चलिये आज भाई कुलदीप जी की
अनुपस्थिति का लाभ उठाया जाए...

"चुनावी फानी" ....

 सेना से निर्वासित सैनिक निर्दलीय चुनाव के लिए खुद को तैयार कर रहा था..
       विपक्षी दल के लोग बैठे हुए आपस में विचार-विमर्श कर रहे थे कि सत्ता पक्ष के प्रमुख के समक्ष किस व्यक्ति को टिकट दिया जाये जो उसे टक्कर देने के साथ-साथ पराजित भी कर सके।

"अरे! भाई अवसर का लाभ उठाइए! आजकल सत्ता पक्ष सेना द्वारा पड़ोसी देश पर हुई विजय को अपने पक्ष में भुना रहा है तो क्यों न हम अभी पिछले दिनों वीडियो वायरल प्रकरण में सेना से निकाले गये सैनिक को टिकट दे दिया जाए।"

तुम .....

चुप रहूँ तो शायद दिल तेरा ख़ुशलिबास हो 
दुआ हर लम्हा,खुश रहे तू न कभी उदास हो

तुम बिन जू-ए-बेकरार,हर सिम्त तलब तेरी
करार आता नहीं,कैसी अनबुझी मेरी प्यास हो

आजा के ओढ़ लूँ ,तुझको चाँदनी की तरह 

चाहती हूँ रुह मेरी तुमसे,रु-ब-रु बेलिबास हो

सुनो बटोही ....

सुनो बटोही,
मष्तिष्क में कौंधते मिथ्या भावों के जालों को तुम्हें सुलझाना है।
निविड़ तिमिर में तुम्हें हौसलों की मशाल जलाना है। 
सम्पूर्ण निष्ठा से रहट बन अनवरत अपना धर्म निभाना है।
पतझड़ में तुम्हें आशाओं के फूल खिलाना है।

भई ये लोकतंत्र है ....

भई ये लोकतंत्र है ..
वो भी संसार का सबसे बड़ा !
कोई क्या कह सकता है किसी को !
पर भाइयों और बहनों कभी तो सोचो !
हम इस लोकतंत्र में रहने लायक हैं क्या ?
लोकतंत्र में रहने के कर्तव्य हमें क्या होंगे पता !
संविधान में दिए अधिकार भी मालूम हैं क्या ?

क्षणिकाएं ....

रोज जाता हूँ उस मोड़ पर
जहां हम बिछुड़े थे कभी
अपने अपने मौन के साथ,
लेकिन रोज टूट जाता स्वप्न
थामने से पहले तुम्हारा हाथ,
उफ़ ये स्वप्न भी नहीं होते पूरे
ख़्वाब की तरह.

सूना जीवन ....

जीवन में कोई अपना हो न,
जीवन लगता बड़ा ही सूना।
दिल भी सूना ,मन भी सूना,
खाली-खाली मन का कोना।

जीवन लगता मरू के जैसे,
प्यास बुझेगी इसकी कैसे।
दूर-दूर तक दिखे न कोई,
जल की बूंद मिलेगी कैसे।

एक खास खबर उलूकिस्तान से

अपनी सरकार को एक
सुझाव मैं देने जा रहा हूँ
पहाड़ी राज्य को प्रगति के पथ
पर ले जाना चाह रहा हूँ
ये ऎक्ट वेक्ट खाली
काहे बदलवा रहे हो
तबादला मंत्री का 
पोर्टफोलियो एक
क्यों नहीं बना रहे हो
लाल बत्ती के एक चाहने 
वाले को क्यों नहीं
इसमें खपा रहे हो
तबादले में सुना था

ई तो हो गया आज का काम
अब हम जाते हैं...
कल मिलिएगा हमारी श्वेता जी से


यशोदा

15 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभातम् दी,.बहुत अच्छी रचनाएँ पढ़वाई आपने..मेरी रचना को देने के लिए स दर आभार दी।

    जवाब देंहटाएं
  2. व्वाहहहहह..
    बेहतरीन...
    सादर..

    जवाब देंहटाएं
  3. बेहतरीन रचना संकलन एवं प्रस्तुति, सभी रचनाएं उत्तम,रचना रचनाकारों को बधाई

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका सहृदय आभार यशोदा जी

      हटाएं
  4. सस्नेहाशीष व शुभकामनाओं के संग हार्दिक आभार छोटी बहना
    अति सुंदर संकलन

    जवाब देंहटाएं
  5. रविवारीय हलचल की सुन्दर पेशकश में 'उलूक' के एक बासी पन्ने को जगह देने के लिये आभार यशोदा जी।

    जवाब देंहटाएं
  6. बेहतरीन लिंक्स एवम प्रस्तुति ..

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत शानदार प्रस्तुति सभी लिंक लुभावनी सामग्री के साथ सभी रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  8. सुन्दर प्रस्तुति दी
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर और रोचक प्रस्तुति। आभार...

    जवाब देंहटाएं
  10. यशोदा जी,सादर आभार ।
    पांच लिंक और पांच विचार ।
    विचार जीवन का आधार ।

    जवाब देंहटाएं
  11. सुन्दर प्रस्तुतिकरण उम्दा लिंक संकलन...

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत ही अच्छा लेख लिखा है आपने, आशा करते है की हमें ऐसे ही लेख यहाँ से पढने को मिले |
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    जवाब देंहटाएं

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