निवेदन।


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रविवार, 20 अक्टूबर 2024

4282 मक्के का आटा और सरसों का साग

 सादर नमस्कार

मिली जुली
पढ़िए कुछ पसंदीदा रचनाएं




एक बार एक राजा ने विद्वान ज्योतिषियों और ज्योतिष प्रेमियों की सभा बुलाकर प्रश्न किया कि जो मेरी जन्म पत्रिका के अनुसार मेरा राजा बनने का योग था मैं राजा बना, किन्तु उसी घड़ी मुहूर्त में अनेक जातकों ने जन्म लिया होगा जो राजा नहीं बन सके क्यों?इसका क्या कारण है ?

राजा के इस प्रश्न से सब निरुत्तर हो गये। क्या जबाब दें कि एक ही घड़ी मुहूर्त में जन्म लेने पर भी सबके भाग्य अलग अलग क्यों हैं?सब सोच में पड़ गये। तभी एक वृद्ध खड़े हुये और बोले महाराज की जय हो !

आपके प्रश्न का उत्तर भला कौन दे सकता है , आप यहाँ से कुछ दूर घने जंगल में यदि जाएँ तो वहां पर आपको एक महात्मा मिलेंगे उनसे आपको उत्तर मिल सकता है।

राजा की जिज्ञासा बढ़ी और घोर जंगल में जाकर देखा कि एक महात्मा आग के ढेर के पास बैठ कर अंगार (गरमा गरम कोयला ) खाने में व्यस्त हैं। सहमे हुए राजा ने महात्मा से जैसे ही प्रश्न पूछा महात्मा ने क्रोधित होकर कहा - "तेरे प्रश्न का उत्तर देने के लिए मेरे पास समय नहीं है मैं भूख से पीड़ित हूँ। तेरे प्रश्न का उत्तर यहां से कुछ आगे पहाड़ियों के बीच एक और महात्मा हैं वे दे सकते हैं।






नभ के भाल पर
जब हुआ उदय
दूधिया चंद्रमा,
झरने लगी चाँदनी
शीतल उजियारी
छल-छल गगरी !
को जागरी ?





न भूले न भूले न भूले रे
मोहे आजी के देवता न भूले रे॥

आजी के देवता बिरवना बिराजें।
आजी के देवता फुलववा बिराजें
पाती-पाती देवी औ साखा-साखा देवा
तुलसी बियहवा न भूले रे॥






अपनी सफाई में इन्होंने हमेशा खजुराहो को सामने कर द‍िया परंतु ये नहीं बताया क‍ि वे काम क्रीड़ा के आसन थे जो योग की श्रेणी में आते हैं।

बहरहाल क‍िसी भी शख्स‍ियत के दो चेहरे होते हैं, रतन टाटा के भी थे, हमें उन दोनों चेहरों को देखकर अपना आंकलन स्वयं करना चाह‍िए क‍ि हम कहां तक इसे देश, संस्कार, और भारतीय सभ्यता के ह‍ित में देखते हैं।





तभी मुझे समझ आया कि सिंधी समाज व्यापार में इतना आगे क्यों है ! उन्होंने ही मुझे बताया कि बांसटाल में कृष्णा आटा चक्की पर यह आपको मिल जाएगा, पर अगली बार आप मुझसे ही लें ! प्रसंगवश बता दूँ कि दो-तीन साल में ही उनकी दूकान से मौसम पर चार से पांच बोरी मक्के का आटा बिकना शुरू हो गया था ! हम जब भी मिलते थे तो इस बात का जिक्र वे वहाँ उपस्थित सभी लोगों से किया करते थे कि शर्मा जी के कारण ये चीज मैंने रखनी शुरू की है ! इसीलिए मुझे तनिक गुमान सा है कि रायपुर में इस व्यंजन को लोकप्रिय बनाने में मेरा भी कुछ योगदान तो जरूर है !  

मकई के आटे के साथ वहाँ सरसों के साग की उपलब्धि की बात भी कर ली जाए ! तो लगे हाथ बता दूँ कि छत्तीसगढ़ में इस तरह के पत्तेदार साग को भाजी कहते हैं, जैसे पालक भाजी, मेथी भाजी,चनाभाजी इत्यादि ! वहाँ के सबसे बड़े सब्जी बाजार, जिसे शास्त्री मार्किट (अंग्रजी भाषा के शब्द छत्तीसगढ़ी में बिलकुल दूध में पानी की तरह घुल-मिल गए हैं) में भी यह ''महोदया'' कभी-कभार ही मिलती थीं !पर शंकर नगर के पास टाटीबंध के इलाके में सुबह लगने वाले बाजार में, जहां छोटे खेतिहर अपना उत्पाद खुद ही ले कर आते थे, इनकी उपलब्धि बनी रहती थी !

****
बस

शनिवार, 19 अक्टूबर 2024

4281...अभ्र ओट मे प्रफुल्लित हर्षित साँवली घटा...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीया मीना भारद्वाज जी की रचना से।  

सादर अभिवादन।

शनिवारीय प्रस्तुति में आज पढ़िए पाँच पसंदीदा रचनाएँ-

780. कुछ ताँका (28 ताँका)6. बच्चों की अम्मा

व्यस्त रहती सदा
काम का टीला 

धीरे-धीरे ढाहती

ज़रा भी न थकती।

*****

शरद पूर्णिमा [ चोका ]

अभ्र ओट मे

प्रफुल्लित हर्षित

साँवली घटा

देख ज्योत्सना छटा

धरा गोद में

रवितनया तीरे

*****

ओ शरद के चाँद

भूल गए थे कर्तव्य अपना

और अपनी पहचान

कि उम्मीदों के दीप

बार-बार जलाते रहना ही

है उनका काम।

*****

दो उँगलियों द्वारा बना V चिन्ह, कहां से आया यह

·         वैसे V चिन्ह का सकारात्मक अर्थ इस बात पर निर्भर करता है कि हाथ किस तरह से रखा गया है यानी उसकी स्थिति क्या है। यदि हाथ की हथेली सामने की तरफ हो तब तो वह सकारात्मक संदेश देता है। पर यदि हथेली सामने वाले के विपरीत हो यानी अंदर की तरफ हो तो इसे कई देशों में यथा ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, यूनाइटेड किंगडम इत्यादि में अपमानजनक इशारा माना जाता है। इसलिए किसी भी चीज को अपनाने के पहले उसकी पूरी जानकारी होनी आवश्यक होती है। 

*****

       मेहंदी डिज़ाइन- भाग 11 (mehndi design- part 11)

 
 

·         कहा जाता हैं कि मेहंदी की महक रिश्तों को भी महकाती हैं। आइए, इस करवा चौथ पर हाथों पर सुंदर-सुंदर मेहंदी डिजाइन सजाकर अपने रिश्तों को महकाइएं..

       *****

         फिर मिलेंगे।

     रवीन्द्र सिंह यादव


शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2024

4280...माटी मेरे गाँव की

शुक्रवारीय अंक में
आप सभी का स्नेहिल अभिवादन।

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मैं जंगल भ्रमण के लिए

उत्सुक रहती हूँ

किंतु जालीदार गाड़ियों से

जानवरों को कौतूहल से देखकर,

पक्षियों की विचित्र किलकारी,

दैत्याकार वृक्षों की 

बनावट से अचंभित

जंगल की रहस्यमयी गंध

स्मृतियों में

भरकर ले तो आती हूँ

पर सोचती हूँ

जंगल के कोने में 

उगी घास की भाँति

दुनिया की भीड़ में

तिनके सा जीना

 क्या यही है जन्म का 

उद्देश्य ?


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आज  की रचनाएँ-


जिस दिन जीत लेंगे उजाला
उस दिन 
घुंघुरुदार पायलें
देहरी देहरी बजेंगी
चूड़ियों की खनकदार हंसी 
अच्छी लगेंगीे

चाँद बजायेगा बांसुरी
तबले पर थाप देगा सूरज
चांदनी की जुल्फों से 
टपकेगी शबनम



चाँद को भी है मयस्सर कहाँ ये दीवाली 
शिव की काशी में गगन दीप जलाते रहिए 

भारतीय संस्कृति की पहचान हैँ मिट्टी के दिए 
घर के आले में या आँगन में जलाते रहिए 

पर्व यह ज्योति,पटाखों का, सफाई का भी 
दिल के पर्दों पे जमीं धूल हटाते रहिए 




वो पहाड़ी धार वाली
बोली द्या अब ना गिरेगी
बाट चौड़े पक्के वाले
 माट में अब ना सनेगी
गाड़ी मोटर पों पों करती
अब तो हर इक ख्वाल आयी
माटी मेरे गाँव की आ के मिली रैबार लायी





जाना कहाँ था, पहुँचे कहाँ हैं 

दाता का दर सदा ही खुला है 


 भटके थे राह अब चेत आया 

क्या वह मिलेगा जो था गँवाया 



दीन के नाम पर खून की होली,
किस ने बताया, ये कौन सा रस्ता है।
दूध तेल की गंगा, नाली में बहती,
सड़क किनारे कोई भूख से खस्ता है।
रोटी के लालच में जो बदला दीन,
या तो मै सस्ता हूँ या दीन सस्ता है


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आप सभी का आभार
आज के लिए इतना ही
मिलते हैं अगले अंक में ।
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गुरुवार, 17 अक्टूबर 2024

4279 ..अब तो वह किसी काम न आयेगा।

 सादर अभिवादन

आज किसी कारण से भाई जी नहीं हैं
शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं

आज की शुरुआत



दुष्टता का कर संहार,
पीहर में करने विश्राम,
अर्थात मनन.. ध्यान ..
जगत जननी, जगद्धात्री माँ
पग फेरे को आईं थी घर
रुप धर कन्या का ।





शिक्षा,  शिक्षित,  और शैक्षणिक संस्थान
ये सब आपस में ऐसे जुड़े है
जैसे एक माँ से बच्चे के हृदय के तार
जो दिखाई कभी नहीं देता
पर बच्चों के चारो ओर कवच बनकर रहता है




शरद ,रास,कोजागिरी,होंगे नाम अनेक।
जीवन पावन हो सफल,लक्ष्य सभी में एक।।

रास देखकर  कृष्ण का,ले विधु जब आनंद।
आत्मसात कर दृश्य को,कवि लिखते नित छंद।।





वह चल दिया ,
जब दुनिया से,
कुछ तो रोये,
लहू के आँसू दिल से बहे
खारे आँख से।
एक हारा हुआ इंसान था वो




छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से तकरीबन पौने चार सौ कि.मी और मुख्यालय अंबिकापुर से लगभग 55 कि.मी. की दूरी पर विंध्य पर्वतश्रेणी में समुद्र तट से 3781' की ऊंचाई पर स्थित है मैनपाट नाम का कस्बा। जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता तथा मौसम की वजह से छत्तीसगढ़ का शिमला कहलाता है। इसी से करीब 8-9 कि.मी. की दूरी पर बसे हुए एक छोटे से गांव बिसरपानी के पास ही है वह जलधारा, जो उल्टा पानी के नाम से प्रसिद्ध है।


आज बस
वंदन

बुधवार, 16 अक्टूबर 2024

4278..मेरा फैसला..


।।प्रातःवंदन।।

 गा रहे श्‍यामा के स्वर में कुछ रसीले राग से,

तुम सजावट देखते हो प्रकृति की अनुराग से।


दे के ऊषा-पट प्रकृति को हो बनाते सहचरी,

भाल के कुंकुम-अरूण की दे दिया बिन्दी खरी..!!

 जयशंकर प्रसाद 

चंद अलंकृत शब्दो से कुछ खिलने का अहसास होता है जिसे समेटने की कोशिशें जारी रखते हुए बुधवारिय अंक में..

पहेलि

किंवदन्ती पहेलियाँ उस काफिर के दस्तखतों सी l

ख़त पैगाम कोई लुभा रही दस्तावेजों ताल्लुक़ सी ll

अख्तियार किया था बसेरा परिंदों ने बिन दस्तकों की l

इजाजत ढूँढ रही धुन उस धुन्ध बिसर जाने की ll

✨️

बुझा दो क्रांति की ये मशालें 

इन रातों को अँधेरे प्यारे हैं 

झूठ के नशे में धुत है जनता,

इन्हें खर्राटे प्यारे हैं!

क्या कहा? नया कल लाना है!

हा! हा! हा! क्यों ये भ्रम पाला है?

✨️

एक रोज आफताब देखने आया था मेरा घर

की कैसे उजला रहता है अंधेरों में ये दर

अंधेरे हमेशा ही मुझसे हार जाते है 

शायद ये मेरी माँ की दुआओं का था असर

✨️

हारा हुआ वजूद!

 #हारा हुआ वजूद!

वह चल दिया ,

जब दुनिया से,

कुछ तो रोये,

लहू के आँसू दिल से बहे

✨️

मेरा फैसला – लघुकथा

आज कक्षा में टीचर बहुत खुश दिखाई दे रही थीं | उन्होंने इशारा करके रोहित को खड़ा किया |

“रोहित, तुम अपनी पढ़ाई समाप्त करने के बाद क्या बनना चाहते हो ?”

“जी टीचर, मैं डॉक्टर बन कर दीन दुखियों और निर्धन रोगियों का मुफ्त में उपचार कर मानवता की सेवा करना चाहता हूँ |”

✨️

।।इति शम।।

धन्यवाद 

पम्मी सिंह 'तृप्ति'..✍️

मंगलवार, 15 अक्टूबर 2024

4277...तू रण में ले भाग

मंगलवारीय अंक में
आपसभी का स्नेहिल अभिवादन।
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*सपना वह चीज नहीं है जो आप नींद में देखते हैं बल्कि सपना वह चीज है जो आपको सोने नहीं देती। आपका सपना सच हो,इससे पहले आपको सपना देखना होगा।


* श्रेष्ठता एक सतत प्रक्रिया है, कोई हादसा नहीं।

* छोटा लक्ष्य अपराध है, लक्ष्य बड़ा रखें।

* जीवन एक मुश्किल खेल है। आप इंसान होने के अपने जन्मजात अधिकार को बरक़रार रखते हुए ही इसे जीत सकते है।

* यदि आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं, तो पहले सूरज की तरह जलें।

* अपनी पहली जीत के बाद आराम न करें क्योंकि अगर आप दूसरी बार असफल हो गए तो और भी होंठ यह कहने के लिए इंतज़ार कर रहे होंगे कि आपकी पहली जीत सिर्फ किस्मत थी।

देश के युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत का आज जन्मदिन है।

डॉ. कलाम का व्यक्तित्व सादगी, प्रेरणा, संघर्ष, देशप्रेम का अद्भुत संगम था। आज भी युवा वर्ग उनके प्रेरक वचनों से प्रेरणा लेता है। उनका जीवन परिस्थितियों के सामने कभी हार नहीं मानने वाला था। वह सपनों को साकार करने की प्रेरणा के साथ देश को मजबूत बनाने में विज्ञान और तकनीकी ज्ञान पर बल देते थे।
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आज की रचनाएँ-



तप हेतु भजं त्वं ऋषि-मुनि संतं, गूँजत दस दिक नाम।
परमारथवादी अति अनुरागी, मंजुल मूरति धाम।।
निर्मित निज माया, सगुण सकाया, निर्गुण भगति विराम।
जड़-चेतनवासी प्रभु दुखनाशी, भजौ तुभ्य अविराम।।
सीता संग वंदन दशरथनंदन, जय श्री सीताराम।
जय परम पुनीतं ज्ञानाधारं, जगदीश्वर श्रीराम।।



कायरता सब छोड़ दे, छोड़ो सब वैराग। 
वीर पुरुष बलवान है, तू रण में ले भाग ।।28।।

ज्ञान योग तूने सुना, आगे सुन अब कर्म। 
कर्म ज़रूरी है सदा, समझो इसका मर्म ।।29।।

कामना जुड़े कर्म से, होता है वह रोग। 
कामना घटे कर्म से, बने वह कर्म योग ।।30


कलियुग के ज़माने में, दिल में हैं कई पापी,
खुद से लड़े खुद ही, जीत पाए ना कदापि।
ये पापी मिटाने का, अवसर ही नहीं मिलता,
रावण ही नहीं जलता।



अस्वस्थ भोजन के साथ हाई बीपी , मोटापा, शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण बढ़ती डायबिटीज , काफ़ी है आदरणीयों की जान लेने को ! सुबह सुबह वाक करने निकले यह साधन संपन्न लोग अपना सबसे क़ीमती समय, साथ चलते दोस्तों से विगत यशगान करने में बिताते हैं !


रॉबर्ट बर्न्स की कविताऍं


ऊबड़ खाबड़ रास्तों पर सूक्ति 
अब मैं पहुंच गया हूँ – भगवान का शुक्र है 
टूटे फूटे रास्तों से गुजरते हुए, 
यह बात पक्की है सड़कें बनाना 
इन लोगों की चिंता नहीं है: 
मैंने धर्मग्रंथ को रटा नहीं फिर भी 
यकीनन बाइबल का कहना है 
अगर वे अपने तरीके सुधारते नहीं तो
असावधान पापियों को नर्क मिलेगा।

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आप सभी का आभार।
आज के लिए इतना ही 
मिलते हैं अगले अंक में।

सोमवार, 14 अक्टूबर 2024

4276 “टीचर, सबसे बड़ा फ़ायदा तो साधू बाबा बनने में ही है |

सादर नमस्कार
मिली जुली
पढ़िए कुछ पसंदीदा रचनाएं




गिट्टियाँ खेलते कोई लिखने लगे
आंगन जरा मत भरमा
अपने लिए हैं खेल अपने हैं
मैदान कौन कहता है शर्मा

मन नहीं है टूटते हैं पुल
शब्दों के इधर और उधर वहाँ
सबके अपने खिलौने आयें
सब और खेलें मिलकर यहां




समय बीतता है ... या बीतते हैं हम
और यादें ... उनका क्या
धार-दार होती रहती हैं समय के साथ





बरस रहे, दो नैन,
मौन, तरस रहे दिन-रैन,
न कोई, बादल,
भीगे हैं आंचल, इन दिनों ....

बहुत याद आए, तुम, इन दिनों!






उसने उस आंख में जड़ी-बूटी लगाई ताकि वह ठीक हो सके लेकिन उससे और रक्‍त आने लगा। आखिरकार,उसने अपनी आंख देने का फैसला किया। उसने अपना एक चाकू निकाला, अपनी दाहिनी आंख निकाली और उसे लिंग पर रख दिया। रक्‍त टपकना बंद हो गया और थिम्मन ने राहत की सांस ली। लेकिन तभी उसका ध्यान गया कि लिंग की बाईं आंख से भी रक्‍त निकल रहा है।

उसने तत्काल अपनी दूसरी आंख निकालने के लिए चाकू निकाल लिया,लेकिन फिर उसे लगा कि वह देख नहीं पाएगा कि उस आंख को कहां रखना है। तो उसने लिंग पर अपना पैर रखा और अपनी आंख निकाल ली। उसकी अपार भक्ति को देखते हुए, शिव ने थिम्मन को दर्शन दिए। उसकी आंखों की रोशनी वापस आ गई और वह शिव के आगे दंडवत हो गया। उसे कन्नप्पा नयनार के नाम से जाना गया। कन्ना यानी आंखें अर्पित करने वाला नयनार यानी शिव भक्त।






अंत में बारी आई देवांश की | टीचर ने उससे भी यही सवाल किया |
“टीचर, मैं साधू बाबा बनना चाहता हूँ |”

टीचर के साथ सारे बच्चे हैरान थे !

“और भला तुम साधू बाबा क्यों बनना चाहते हो बताओगे |” टीचर ने पूछा |

“टीचर, सबसे बड़ा फ़ायदा तो साधू बाबा बनने में ही है | कहीं कोई डिग्री नहीं दिखानी पड़ती, कोई एंट्रेंस इम्तहान पास नहीं करना पड़ता, किसी को रिश्वत नहीं देनी पड़ती | बस किराए के कपड़े पहन कर, दो चार बढ़िया बढ़िया भजन याद कर कीर्तन और सत्संग के नाम पर थोड़ी सी भीड़ जुटा लो एक दो बार, आपके तो समर्थक बढ़ते ही जायेंगे

बस

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