सादर नमस्कार
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
निवेदन।
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रविवार, 20 अक्टूबर 2024
4282 मक्के का आटा और सरसों का साग
शनिवार, 19 अक्टूबर 2024
4281...अभ्र ओट मे प्रफुल्लित हर्षित साँवली घटा...
सादर अभिवादन।
शनिवारीय प्रस्तुति में आज पढ़िए पाँच पसंदीदा रचनाएँ-
780. कुछ ताँका (28 ताँका)6. बच्चों की अम्मा
धीरे-धीरे ढाहती
ज़रा भी न थकती।
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अभ्र ओट मे
प्रफुल्लित हर्षित
साँवली घटा
देख ज्योत्सना छटा
धरा गोद में
रवितनया तीरे
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भूल गए थे
कर्तव्य अपना
और अपनी
पहचान
कि उम्मीदों
के दीप
बार-बार
जलाते रहना ही
है उनका
काम।
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दो उँगलियों द्वारा बना V चिन्ह, कहां से आया यह
· वैसे V चिन्ह का सकारात्मक अर्थ इस बात पर निर्भर करता है कि हाथ किस तरह से रखा गया है यानी उसकी स्थिति क्या है। यदि हाथ की हथेली सामने की तरफ हो तब तो वह सकारात्मक संदेश देता है। पर यदि हथेली सामने वाले के विपरीत हो यानी अंदर की तरफ हो तो इसे कई देशों में यथा ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, यूनाइटेड किंगडम इत्यादि में अपमानजनक इशारा माना जाता है। इसलिए किसी भी चीज को अपनाने के पहले उसकी पूरी जानकारी होनी आवश्यक होती है।
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मेहंदी डिज़ाइन- भाग 11 (mehndi design- part 11)
·
कहा जाता
हैं कि मेहंदी की महक रिश्तों को भी महकाती हैं। आइए, इस करवा चौथ पर हाथों पर सुंदर-सुंदर
मेहंदी डिजाइन सजाकर अपने रिश्तों को महकाइएं..
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फिर
मिलेंगे।
रवीन्द्र
सिंह यादव
शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2024
4280...माटी मेरे गाँव की
मैं जंगल भ्रमण के लिए
उत्सुक रहती हूँ
किंतु जालीदार गाड़ियों से
जानवरों को कौतूहल से देखकर,
पक्षियों की विचित्र किलकारी,
दैत्याकार वृक्षों की
बनावट से अचंभित
जंगल की रहस्यमयी गंध
स्मृतियों में
भरकर ले तो आती हूँ
पर सोचती हूँ
जंगल के कोने में
उगी घास की भाँति
दुनिया की भीड़ में
तिनके सा जीना
क्या यही है जन्म का
उद्देश्य ?
जाना कहाँ था, पहुँचे कहाँ हैं
दाता का दर सदा ही खुला है
भटके थे राह अब चेत आया
क्या वह मिलेगा जो था गँवाया
गुरुवार, 17 अक्टूबर 2024
4279 ..अब तो वह किसी काम न आयेगा।
सादर अभिवादन
बुधवार, 16 अक्टूबर 2024
4278..मेरा फैसला..
।।प्रातःवंदन।।
गा रहे श्यामा के स्वर में कुछ रसीले राग से,
तुम सजावट देखते हो प्रकृति की अनुराग से।
दे के ऊषा-पट प्रकृति को हो बनाते सहचरी,
भाल के कुंकुम-अरूण की दे दिया बिन्दी खरी..!!
जयशंकर प्रसाद
चंद अलंकृत शब्दो से कुछ खिलने का अहसास होता है जिसे समेटने की कोशिशें जारी रखते हुए बुधवारिय अंक में..
पहेलि
किंवदन्ती पहेलियाँ उस काफिर के दस्तखतों सी l
ख़त पैगाम कोई लुभा रही दस्तावेजों ताल्लुक़ सी ll
अख्तियार किया था बसेरा परिंदों ने बिन दस्तकों की l
इजाजत ढूँढ रही धुन उस धुन्ध बिसर जाने की ll
✨️
इन रातों को अँधेरे प्यारे हैं
झूठ के नशे में धुत है जनता,
इन्हें खर्राटे प्यारे हैं!
क्या कहा? नया कल लाना है!
हा! हा! हा! क्यों ये भ्रम पाला है?
✨️
एक रोज आफताब देखने आया था मेरा घर
की कैसे उजला रहता है अंधेरों में ये दर
अंधेरे हमेशा ही मुझसे हार जाते है
शायद ये मेरी माँ की दुआओं का था असर
✨️
#हारा हुआ वजूद!
वह चल दिया ,
जब दुनिया से,
कुछ तो रोये,
लहू के आँसू दिल से बहे
✨️
आज कक्षा में टीचर बहुत खुश दिखाई दे रही थीं | उन्होंने इशारा करके रोहित को खड़ा किया |
“रोहित, तुम अपनी पढ़ाई समाप्त करने के बाद क्या बनना चाहते हो ?”
“जी टीचर, मैं डॉक्टर बन कर दीन दुखियों और निर्धन रोगियों का मुफ्त में उपचार कर मानवता की सेवा करना चाहता हूँ |”
✨️
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह 'तृप्ति'..✍️
मंगलवार, 15 अक्टूबर 2024
4277...तू रण में ले भाग
आपसभी का स्नेहिल अभिवादन।
*सपना वह चीज नहीं है जो आप नींद में देखते हैं बल्कि सपना वह चीज है जो आपको सोने नहीं देती। आपका सपना सच हो,इससे पहले आपको सपना देखना होगा।
* श्रेष्ठता एक सतत प्रक्रिया है, कोई हादसा नहीं।
* छोटा लक्ष्य अपराध है, लक्ष्य बड़ा रखें।
* जीवन एक मुश्किल खेल है। आप इंसान होने के अपने जन्मजात अधिकार को बरक़रार रखते हुए ही इसे जीत सकते है।
* यदि आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं, तो पहले सूरज की तरह जलें।
* अपनी पहली जीत के बाद आराम न करें क्योंकि अगर आप दूसरी बार असफल हो गए तो और भी होंठ यह कहने के लिए इंतज़ार कर रहे होंगे कि आपकी पहली जीत सिर्फ किस्मत थी।
देश के युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत का आज जन्मदिन है।
डॉ. कलाम का व्यक्तित्व सादगी, प्रेरणा, संघर्ष, देशप्रेम का अद्भुत संगम था। आज भी युवा वर्ग उनके प्रेरक वचनों से प्रेरणा लेता है। उनका जीवन परिस्थितियों के सामने कभी हार नहीं मानने वाला था। वह सपनों को साकार करने की प्रेरणा के साथ देश को मजबूत बनाने में विज्ञान और तकनीकी ज्ञान पर बल देते थे।------
आज की रचनाएँ-
रॉबर्ट बर्न्स की कविताऍं
मिलते हैं अगले अंक में।






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