
सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष
१.
स्वस्थ रहें हम सब, स्वच्छ रहें हम सब ।
२.
स्वास्थ्य का रखें पहले ध्यान, बाद ही में करें कोई अन्य काम ।
३.
व्यायाम से स्वास्थ्य सुधरे, शरीर का ओज निखरे।
४.
अच्छे स्वास्थ्य से ही जीवन, बीमारी से सब कुछ दुर्गम।
५.
कर्म है हर मनुष्य का कर्तव्य, स्वस्थ हो तभी प्राप्त करेगा लक्ष्य ।
६.
स्वस्थ रहे शरीर तो संभव है हर काम, स्वास्थ्य यदि साथ हो तो तय करे हर मुकाम ।
७.
योग प्राणायाम और ध्यान करे , रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़े।
८.
रोग का कारण अनियमित जीवन, जागरूक हों और लाएँ संतुलन ।
९.
प्रतिदिन १० मिनट योग करें, रोग-दोष को दूर करें ।
१०.
स्वास्थ्य के प्रति बनें जागरूक, सफल जीवन का रुख ।
११.
स्वच्छता से स्वास्थ्य बनें, स्वास्थ्य से जीवन बने ।
१२.
वर्त्तमान में हर रोग का निदान, विविध चिकित्सा उपचार हैं प्रधान ।
रोग ही न हो शरीर में आपके, यदि यही सोच हो तो आप हैं महान ॥
१३.
आधुनिक चिकित्सा करे रोग का उपचार, निरोगी रहो न लाओ ऐसी स्थिति बार-बार ।
तेज़ गर्मी से राहत दिलाती बरसात
लेकिन
खतरा लाती वो स्वास्थ्य पर
शायद इसलिए हम आज मनाते हैं
आयुर्वेदिक दोहे
प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली
अर्चना वैद्य करंदीकर की कविताएँ
आयुर्वेद या एलोपैथी : कौन है ज्यादा असरदार?
स्वास्थ्य ठीक रहे इसके लिए...
लिंक में हिंट जानबूझ कर...
हँसना जरूरी बिलकुल नहीं है
प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली
अर्चना वैद्य करंदीकर की कविताएँ
आयुर्वेद या एलोपैथी : कौन है ज्यादा असरदार?
स्वास्थ्य ठीक रहे इसके लिए...
लिंक में हिंट जानबूझ कर...
हँसना जरूरी बिलकुल नहीं है
फिर मिलेंगे
विभा रानी श्रीवास्तव