शत शत प्रणाम
भगवान श्री जगन्नाथ को
रविवार, 19 जुलाई 2015 को
याद करती हूँ..... आज का दिन
आज के दिन ही प्रसव हुआ
आज के दिन ही प्रसव हुआ
नन्हे शिशु "पांच लिंकों का आनन्द" का
साथ जुड़े भाई कुलदीप जी
इस शीर्षक के साथ
स्वाभाविक है..जीवन साथी ने भी साथ दिया...
फिर इस नन्हे शिशु का हाथ थामा
मातृतुल्य विभा दीदी नें
मातृतुल्य विभा दीदी नें
पहले ही अंक से मेरा हौसला बढ़ाते हुए
मेरे अग्रज भाई डॉ. सुशील जी जोशी ने
अब तक मुझे दुलारते,पुचकारते व ललकारते हुए
आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहे..
अब तक मुझे दुलारते,पुचकारते व ललकारते हुए
आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहे..
यहाँ तक की यात्रा जारी रही निर्बाध, निरंतर
चलते-चलते तीन साथी और मिले....
पम्मी सिंह जी, ध्रुव सिंह जी एवं रवीन्द्र सिंह जी
आभार उन सभी को हम सफर बनने के लिए
चलते-चलते तीन साथी और मिले....
पम्मी सिंह जी, ध्रुव सिंह जी एवं रवीन्द्र सिंह जी
आभार उन सभी को हम सफर बनने के लिए
हिन्दी तिथि के अनुसार आज का ये अंक
वर्षगाँठ अंक है....बधाइयों की हकदार है ये
"पांच लिंकों का आनन्द"
मैं भूली नहीं हूँ अपने अतिथियों को
उन्होंने यहां आकर मेरा मान बढ़ाया
उन्होंने यहां आकर मेरा मान बढ़ाया
अब चलिए चलते हैं आज के नियमित अंक की ओर..
आज रथ यात्रा भी है...बड़ा ही शुभ दिवस
और सोने में सोहागा कि कल ईद-उल-फितर भी है
अद्भुत संगम है दोनों उत्सव का

बरसों से सोंचे शब्द भी उस वक्त तो बोले नहीं
जब सामने खुद श्याम थे तब रंग ही घोले नहीं !
कुछ अनछुए से शब्द थे, कह न सके संकोच में,
जानेंगे क्या छूकर भी,हों जब राख में शोले नहीं !

इश्क पर ज्यों ज्यों कड़ा पहरा हुआ|
रंग इसका और भी गहरा हुआ|
कह रहे थे तुम कि गुनती जाती मैं|
यूँ अचानक आज इक मिसरा हुआ|
क्षितिज की रक्तिम लावण्य में,
निश्छल स्नेह लिए मन में,
दिग्भ्रमित हो प्रेमवन में,
हर क्षण जला हूँ मैं अगन में...
ज्यूँ छाँव की चाह में, भटकता हो चातक सघन वन में।
इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ ---अहमद फ़राज़
इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
क्यूँ न ए दोस्त हम जुदा हो जाएँ
तू भी हीरे से बन गया पत्थर
हम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएँ

एक दिन.....श्वेता सिन्हा
खुद को दिल में तेरे छोड़ के चले जायेगे एक दिन
तुम न चाहो तो भी बेसबब याद आयेगे एक दिन
जब भी कोई तेरे खुशियों की दुआ माँगेगा रब से
फूल मन्नत के हो तेरे दामन में मुसकायेगे एक दिन
इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ ---अहमद फ़राज़
इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
क्यूँ न ए दोस्त हम जुदा हो जाएँ
तू भी हीरे से बन गया पत्थर
हम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएँ

एक दिन.....श्वेता सिन्हा
खुद को दिल में तेरे छोड़ के चले जायेगे एक दिन
तुम न चाहो तो भी बेसबब याद आयेगे एक दिन
जब भी कोई तेरे खुशियों की दुआ माँगेगा रब से
फूल मन्नत के हो तेरे दामन में मुसकायेगे एक दिन

कुछ तेरे ही हैं
आस पास हैं
और बाकी
बचे कुछ
क्या हुआ
अगर बस
आठ पास हैं
हिन्दी को
बचा सकते हैं
जो लोग वो
बहुत खास हैं
खास खास हैं।
....
काफी कुछ लिख गई
पर भाई कुलदीप जी हमारे ब्लॉग
पर भाई कुलदीप जी हमारे ब्लॉग
"पांच लिंकों का आनन्द"
का वर्षगाँठ 19 जुलाई को ही मनाते हैं
कुछ विशेष यादगार होता है
का वर्षगाँठ 19 जुलाई को ही मनाते हैं
कुछ विशेष यादगार होता है
वर्षगाँठ अंक..प्रतीक्षा करें
सादर
सादर


