सादर अभिवादन
इस बार लोगों में रामनवमी की सही तारीख को लेकर कंफ्यूजन है.
जानें 26 या 27 मार्च में कब मनाई जाएगी रामनवमी,
ये युद्ध क्या हुआ, सारे धार्मिक पंचांग गड्ड-मड्ड हो गए
चलिए दो दिन मना लेते हैं दो दिन पंजीरी खा लेंगे
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हाँ , मन लौटना चाहता है
अंतरतम की गहरी गली में..
जहाँ मिले उसे
अपना संतुलन,
अपनी गहराई,
अपना मौन और
असीम शांति के साथ वही स्थिरता
जिसमें बड़े सुकून से
धीरे-धीरे जन्म लेगी
फिर से...
उसकी अनुभूतियों की
वही कोमल धारा ।
उसकी अपनी कविता !
वह रहती या रहता कान्हा
दोनों नहीं समाते घर में,
नील गगन सा जो विशाल है
प्रेम रहेगा कैसे मन में !
धोखेबाज खुश्बुओं के वृत
केंद्र बदबुओं से शासित है
नाटक-त्राटक, चढ़ा मुखौटा
रीति-नीति हर आयातित है
भागें कहां,
खडे सिर दुर्दिन
पड़ा फूंस है, लगे पलीते---
समाप्ति की क़गार पर खड़े
बोझिल संबंधों के कदम,
छटपटाते बेचैन हो,
दहलीज पार करने को,
लुभा रहा जो आकर्षण,
बाहर की दुनिया का
वो जो, गुजर रहा ये लम्हा,
वो जो, पुनः घटित हो रहा ये यहां,
उकेरेगी मन पर कोई निशाँ,
कल वे, बनेंगी दास्तां!
कुएँ की अँधेरी देह में
जल की तरह
ठहर जाती है
जहाँ गिरती हुई आवाज़ें
अपने ही वज़न से
धीरे-धीरे
डूबती हैं,
मौन की तलछट में बदलती,
और फिर
किसी अनजानी प्यास की दरार से
फिर से
कविता की तरह
रिसने लगती हैं।
गद्दारों के मुँह पर चाँटा
पाकपरस्तों में सन्नाटा
सत्तर साल का भांडा फूटा
सेकुलरिज्म के पाँव में कांटा
भारत की सेना की ताकत
का सुन्दर पैगाम धुरंधर.
सादर समर्पित
सादर वंदन




