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सोमवार, 9 मार्च 2026

4676 माँ का दिल तब भी धड़कता था फ़िक्र के साये में,

 सादर अभिवादन 




खुश रहो सदा, किसी को दुःख न देना जीवन में,
इंसानियत का हाथ बढ़ाना तुम भी हर रास्ते।

'फ़िज़ा' की दुआ है माँ के दिल की गहराइयों से,
मुस्कुराते रहो तुम यूँ ही जीवन भर हर रास्ते।




रंग देखे अनगिनत ..
सुबह-शाम के 
भोर और गोधूलि के ।
हरे-भरे पात वर्षा में धुले,
ओस की बूँद में धनक,
फूलों में खिले रंग शर्मीले,





इस और से उस और से पहुँचोगे वहीं पर,
चलने के इरादे पे न तुम ऊँगली उठाना.

माना के हमें भूलना मुमकिन तो नहीं है,
इस मील के पत्थर को मगर भूल ही जाना.




अगर मेरे बस में ये बादलों की स़फेद रुई होती,
तो मैं इससे तुम्हारे लिए एक नरम सी ज़मीन ढालता,
चुनता समंदर की लहरों से संगीत के कुछ क़तरे,
और तुम्हारे रास्ते में ख़ामोश ख़ुशबू सी बिछाता।






सम्मान एक संस्कार है, 
एक दृष्टि है, एक सोच है।
जिस दिन हमारी नज़रों में 
हर महिला के लिए 
सच्चा आदर होगा,जिस दिन 
हर बेटी खुद को 
सुरक्षित महसूस करेगी,
वह दिन वास्तव में महिला दिवस बन जाएगा।


सादर समर्पित
सादर वंदन
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