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मंगलवार, 15 नवंबर 2016

487....व्यक्त जिनको कर न पाए मूकवत मन की व्यथा हैं


जय मां हाटेशवरी...

कल गुरुनानक प्रकाशोत्सव था...
पर चर्चा बाल दिवस की ही रही...
बच्चों को भी पता तक नहीं है कि...
कौन हैं श्री गुरु नानक...
उनकी शिक्षाएं क्या हैं...
मैं हैरान हूं कि...
ये कैसी शिक्षा-प्रणाली है...
पढ़ते हैं आज के लिंक...


तुम अलग युग की कहानी....अभिषेक शुक्ला



इन आँखों से ये ख्वाब ले लो.... दिगम्बर नासवा



भीड़ में सबसे पीछे खड़े का कौन सहारा...गगन शर्मा




माँ..... राजीव शर्मा




लानत.........दिव्या माथुर


आज मेरे कम्प्यूटर में जरा गड़बड़ी पैदा हो गई
एक मित्र की सहायता से ये प्रस्तुति बना पाया हूँ
एवं सूचना भी किसी को नहीं दे पाया हूँ
क्षमा.....







रविवार, 16 अक्टूबर 2016

457....गीत पर एक गीत

     सुप्रभात 
नमस्कार दोस्तो 
आज रविवारीय चर्चा मे आपका स्वागत है 

आइए आज की लिंको की ओर.......



दस्तक दे रहा है दर्द 
कोई दिल पर आज,
लगता है फिर से हुई 
कोई खुशी नाराज़।

सोचती हूं हर बार न 
होठों पर हंसी आए,
कोई न इस तरह से 
यूं मुझे नज़र लगाए,
गुलशन पर मेरे कोई 
फिर गिरा गया है गाज़,



अच्छे के साथ अच्छा होता है ।

     


कभी चढ़ाई है यहाँ, होता कभी ढलान।
नहीं समझना सरल कुछ, जीवन का विज्ञान।।
--
सच्ची होती मापनी, झूठे सब अनुमान।
ताकत पर अपनी नहीं, करना कुछ अभिमान।।
--
कंचन काया को कभी, माया से मत तोल।
दौलत के अभिमान में, बुरे वचन मत बोल।।




बच्चो,
तुम इस देश के भविष्य हो,
तुम दिखते हो कभी,
भूखे, नंगे ||

कभी पेट की क्षुधा से,
बिलखते-रोते.
एक हाथ से पैंट को पकड़े,
दूजा रोटी को फैलाये ||



'नानी ,काँ पे हो...?'
'कौन है ?'अनायास मेरे मुँह से निकला,
महरी बोली,'आपकी नतनी ,और कौन ?'
वैसे मैं जानती हूँ कौन आवाज़ लगा रहा है.
और कौन हो सकता है इतना बेधड़क !
पहले चिल्ला कर पूछती है ,पता लगते ही दौड़ कर चली आती है.नानी के हर काम में दखल देना जैसे उसका जन्म-सिद्ध अधिकार हो. 
सोच रही थी मशीन पर बैठ कर उसकी फ़्राक की सिलाई पूरी कर दूँ .


गीत बिना मर जाएंगे। 
पत्तों-सा झर जाएंगे।

गीत हमें ज़िंदा रखते हैं, 
घावों को सहलाते हैं। 
जब हम होते एकाकी तो -
गीत दौड़ कर आते हैं। 
अगर गीत निकले जीवन से, 
बाद में हम पछताएंगे।।
गीत बिना मर जाएंगे।


अब दिजिए आज्ञा 
आप मुझे यहा पर मिल सकते है
विरम सिंह
सादर 

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