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मंगलवार, 21 अक्टूबर 2025

4547....गरीब की रोशनी और अमीर की रोशनी

आपसभी का स्नेहिल अभिवादन।
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दीवाली के दूसरे दिन 
बुझे दीयों को इकट्ठा करते,जले पटाखों के ढेर से 
ज़िंदा पटाखे ढूंढते बच्चे 
छोटी-छोटी खुशियॉं तलाशते
शायद उम्मीद की किरणें हैं...।
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दीपोत्सव के
अगले दिन अन्नकूट कई राज्यों में मनाया जाता है, खासकर उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में। इसे गोवर्धन पूजा के रूप में भी जाना जाता है। परंतु झारखंड में गोहाल पूजा किया जाता है इस दिन लोग गोहाल यानि पशु रखने  की जगह को गोबर से लेप कर सजाते हैं और दीप जलाते हैं. बैलों के सींग में तेल व धान का माला पहनाया जाता हैं. उनके शरीर में रंग-बिरंगे छाप दिये जाते हैं. शाम के वक्त महिलाएं सूप में चावल व दीप लेकर बैलों को चूमाती है और गुड़ पीठा खिलाती है।


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 आइये पढ़ते हैं
बासी दिवाली  ताज़ा रचनाऍं

रोशनी बेचने से लेकर
रोशनी खरीदने के बीच की
दूरियां कहें या खाई कहें
बहुत प्यार से भरती चली जाती हैं स्वत: ही
गरीब की रोशनी और अमीर की रोशनी
सब साई के
"सबका मालिक एक" के मानिंद
आत्मसात कर लेती हैं एक दूसरे को



फिर
संवेदनाओं के चंगुल में फंसकर
जनमत के बाजार में
नीलाम होने लगा
जूझता रहा आंधियों से
लेकिन
नहीं ख़त्म होने दी
अपनी टिमटिमाहट




न होते तुम अगर, ना जगती उम्मीद ये,
रहता जहां पड़ा, यूं ही अंधकार में,
विश्वास, यूं भर जाओ!

विलख रहा जो मन, तू उनको आस दो,
मन के अंधकार को, यूं प्रकाश दो,
इक विहान, बन आओ!




तुम चकरी चलाती हो,
तो मैं सोचता हूँ,
कितना हुनर है तुममें,
तुम्हें बनाना भी आता है,
चलाना भी।



न जाने
कितनी आंखों को आज भी
है क्षितिज में उभरती
हुई हल्की रौशनी
की तलाश,
न जाने
कितने
ही
दिलों में हैं बाक़ी आज भी एक
ख़ूबसूरत दीवाली की आस,


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आज के लिए इतना ही 
मिलते हैं अगले अंक में।

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