सादर अभिवादन
कल करवा चौथ था
सफल होना चाहिए व्रत
आमीन
आइए रचनाएं देखें
बे-शक चाँद पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है
उबड़-खाबड़ सतह पर कैसा ईश अनुग्रह है ?
वहां जीवन अनुपलब्ध है
न ही ऑक्सीजन उपलब्ध है
ग्रेविटी में छह गुना अंतर है
दूरी 3,84,400 किलोमीटर है
फिर भी चाँद हमारी संस्कृति की महकती ख़ुशबू है
जो महकाती है जीवन
पल-पल जीवन भर अनवरत......!
दुःख दिखा तो सही, बता तो सही
सुख लाऊंगा, वचन दिया !
तू अकेली नहीं, जगत में कहीं
संग रहूँगा, वचन दिया !
एक संकल्प मैं भी लेना चाहता हूँ, आज
करना चाहता हूँ तमाम सांसें, साझा तेरे साथ
दुआ करना करवा माई से
स्वीकार हो मेरा भी संकल्प पूजा के साथ
“मुझे नहीं करनी अभी कोई शादी - वादी! पहले मैं MBA पूरा करूंगी, उसके बाद ही कुछ सोचूंगी इस बारे में।” - बोलते हुए सनाया तेज गति से चलते हुए सीढ़ियां चढ़कर ऊपर अपने रूम की तरफ चली गई।
“आपको भी अभी करनी थी इसकी शादी की बात!” - मम्मी बोली।
“तो और कब करता, फिर इसके बाद अंजू का भी तो देखना है।”
“क्या ?” - हैरानी भरे स्वर में अंजू बोली - “अब बात सनाया से मुझ पर कैसे आ गई ?”
गुस्से में उठकर वह भी अपने रूम की तरफ चल पड़ी।
ईशान पहले ही स्कूल का अधूरा होमवर्क करने के लिए अपने रूम में जा चुका था।
“आपको भी ना, खुशी बर्दाश्त नहीं होती बच्चों की।” - बोलते हुए मम्मी भी किचन की तरफ चल पड़ी।
“और शर्माजी ने पास पड़ा न्यूजपेपर फिर से हाथ में ले लिया।
मैंने पूछ ही लिया-‘उस्ताद! तुम्हें भी का क्या मतलब है। किसी और को भी नोबेल पुरस्कार मिलने जा रहा है क्या? वैसे उस्ताद, एक बात बता दूं। मुझे कोई नोबेल- सोबेल मिलने वाला नहीं है। अरे, आज तक किसी गली-कूचे की साहित्यिक, सांस्कृतिक या राजनीतिक संस्था ने मुझे दो कौड़ी का पुरस्कार देने योग्य नहीं समझा, तो भला नोबेल-शो
बेल की बात ही क्या कही जाए। लेकिन एक बात बताइए क्या सचमुच अपने देश में किसी को नोबल पुरस्कार मिलने जा रहा है क्या?’
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आज बस
कल भी हैं ही आऊंगी

