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मंगलवार, 19 अगस्त 2025

4485...मैंने चुना अर्जुन होना

मंगलवारीय अंक में
आपसभी का स्नेहिल अभिवादन।
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आज आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का जन्मदिन है।
हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के कुछ प्रेरक वाक्य

*महान संकल्प ही महान फल का जनक होता है

*जीना भी एक कला है, बल्कि कला ही नहीं तपस्या है।
*ईमानदारी और बुद्धिमानी के साथ किया हुआ काम कभी व्यर्थ नहीं जाता।
*जीतता वह है जिसमें शौर्य,धैर्य,साहस,सत्व और धर्म होता है ।
*जो लोग दूसरो को धोखा देते है वे लोग खुद धोखा खाते हैं और जो लोग दूसरों के लिए गड्ढा खोदते हैं उनके लिए कुआँ तैयार रहता है।
*दुनिया बस अपने स्वार्थ की मीत है, बस उतना ही याद रखती है जितना कि उसका स्वार्थ चाहता है

* "जीवन की सार्थकता तभी है जब हम दूसरों के लिए जिएँ।"

* "साहित्य समाज का दर्पण है, और हमें इसे साफ रखना चाहिए।"

* "ज्ञान और अनुभव दोनों ही जीवन के लिए आवश्यक हैं।"

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आज की रचनाएँ-



तुम्हारे भीतर बहते सत्य को
कम नहीं करता।
शिव ने तुम्हें अपनी जटाओं में बांधा,
तुमने स्वयं को संयमित किया 
पर जब त्रिनेत्र खुला,
 तांडव की लय फूटी,
तब तुम्हारा प्रचंड प्रवाह
किसी के वश में नहीं रहा।



और मैंने चुना अर्जुन होना
शस्त्र उठाना
अपनी धारा के विरुद्ध बहना…।
और जब धारा में खुद को छोड़ दिया—
तो असंभव कुछ भी नहीं रहा


जो पेड़ आज परिंदो का आशियाना है 
वसंत आने के पहले वो बेलिबास रहा 

किसी के आने की आहट थी चाँदनी की तरह 
तमाम रात अँधेरे में भी उजास रहा 

न मोर पंख न तितली,नदी, हिरण भी नहीं 
ये गाँव गाँव नहीं था ये बस नख़ास रहा 




जैसे धरती की सोंधी सी 
महक उठी हो 
जैसे कोई वनीय बेला 
गमक रही हो 
या फिर कोई कोकिल गाये 
मधु उपवन में 
जैसे गैया टेर लगाये 
सूने वन में 
श्याम मेघ तिरते हो जैसे 
नीले नभ में 




जब लिखती है स्त्री
गेरू या गोबर से
या
काढ़ रही होती है
बेलबूटे
वह
बचाती है प्रेम
बचाती है सपना
बचाती है गृहस्थी
बचाती है वन
बचाती है प्रकृति
बचाती है पृथ्वी


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आज के लिए इतना ही 
मिलते हैं अगले अंक में।

रविवार, 11 मई 2025

4485...माँ बीज फ़सल खलिहान रोपती गुण काटे अवगुण संयम का भंडार...

सादर अभिवादन।

अंतरराष्ट्रीय मातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

माँ को समर्पित मेरी एक रचना-

माँ (वर्ण पिरामिड)


माँ  
सृष्टि 
स्पंदन  
अनुभूति 
सप्त-स्वर में 
गूँजता संगीत 
वट वृक्ष की छाँव।  


माँ 
आँसू 
ममता 
संवेदना  
गोद में लोक 
जीवन आलोक
निर्झर-सा प्रवाह। 


माँ 
शब्द 
क़लम 
रचना है 
कैनवास है 
सनी है रंग में  
कूची चित्रकार की। 


माँ 
बीज 
फ़सल 
खलिहान 
रोपती गुण 
काटे अवगुण 
संयम का भंडार। 


माँ 
थामे 
अँगुली 
देती ज्ञान 
मिथ्या संसार 
चरित्र-निर्माण 
संस्कारवान पथ। 


माँ 
फूल 
महक
बग़िया में 
मोहक कूक   
पालती उसूल 
दे थपकी गा लोरी।


माँ 
राग 
प्रकृति
अरुणिमा 
भावों का गाँव
प्यारी धूप-छाँव
गौरव जीवन का।       

© रवीन्द्र सिंह यादव

***** 

कल शाम 5 बजे अमेरिका के दख़ल से भारत-पाक के बीच संघर्ष विराम घोषित हो गया। ख़बर अच्छी है शांति के हिमायतियों के लिए। इस बीच अपने अस्तित्त्व के संकट से गुज़र रहा आतंक का संरक्षक पाकिस्तान इस बार अच्छी तरह अपने दाँत खट्टे करा चुका है भारतीय सैन्य बलों द्वारा। लेकिन मुझे संदेह है कि पाकिस्तान शांति के लिए अपनी प्रतिबद्धता को पूरा कर सकेगा।

*****

 आइए पढ़ते हैं आज की ताज़ा-तरीन रचनाएँ-

क्षुब्ध हूँ मैं

अल्लसुबह  
दूर क्षितिज पर छाई लालिमा में
बालारुण की अरुणाई और
भोर के सुनहरे उजास के स्थान पर
युद्ध में हताहत
असंख्यों निर्दोष मासूम बच्चों
स्त्रियों और शूरवीर योद्धाओं के
  
रक्त की लालिमा दिखाई दे रही है

*****

जब युद्ध में हो संवाद!

जाग उठे अब जन-जन ऐसी रणभेरी बजने दो,

क्रांति बिगुल बजाए ऐसा हर मस्तक सजने दो!

विप्लव आज अवश्यम्भावी युग बीते हम सोये

कैद हुए नित पीड़ा में पाया क्या बस रोये?

*****

तटस्थता अस्तु

कहीं निष्क्रिय

कहीं उदासीन

कहीं कुटिल

कहीं पदासीन

*****

मधुमालती वाली खिड़की

जब जब माँ की खिड़की के बाहर वाले मधुमालती के वे सुंदर खिले फूल याद करती हूँ तब तब ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ कि हमारे सैनिक भी खिले रहें, खुश रहें, देश में शांति रहे, कभी युद्ध जैसी स्थिति न बने और हमारी सेना सुरक्षित रहे ताकि देश सुरक्षित रहे।

*****

शिक्षा और सम्मान पर तो सबका बराबर हक़ है- संगीता फ़रासी

इन उपायों से बच्चों की नियमितता बढ़ी। ज़ाहिर है, इसका बहुत असर उनके अच्छा पढ़ने-लिखने और अन्य बातें सीखने के अवसरों पर भी पड़ा। बेस्ट मॉम का पहला अवॉर्ड मिला था अंकुल की माँ को। अंकुल अब हाई स्कूल की परीक्षा दे रहा है और बस्ती के बाक़ी बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ही उनकी मदद भी करता है।

*****

लड़ाई रुक गई, पर इससे पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर गहरा असर होगा

भारत ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ अब केवल युद्धविराम की प्रक्रिया से जुड़े मसलों पर ही बात होगी। शेष किसी भी विषय पर वार्ता नहीं होगी। सबसे बड़ा सवाल सिंधु जल-संधि से जुड़ा है। मुझे लगता है कि भारत अब भारत इस संधि की शर्तों में बदलाव पर जो़र देगा। बहरहाल देखना होगा कि 'ऑपरेशन सिंदूरके तहत तीन दिन चली लड़ाई का पाकिस्तानी राजनीति पर क्या असर होगा। उससे भी बड़ा सवाल जनरल आसिम मुनीर के भविष्य का है। लगता है कि पाकिस्तान की सेना के भीतर उनका विरोध हो रहा है।

*****

 फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 


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