सादर अभिवादन
विश्व एड्स दिवस प्रतिवर्ष 1 दिसंबर को एचआईवी/एड्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने, एचआईवी से पीड़ित लोगों के प्रति समर्थन दिखाने और एड्स से संबंधित बीमारियों से मरने वालों को याद करने के लिए मनाया जाता है. यह एक वैश्विक पहल है जो व्यक्तियों, समुदायों और सरकारों को एचआईवी/एड्स के खिलाफ लड़ाई में कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित करती है. यह दिन बीमारी के बारे में शिक्षा को भी बढ़ावा देता है, परीक्षण के महत्व पर प्रकाश डालता है और एचआईवी से जुड़े कलंक को कम करने के लिए समझ को बढ़ावा देता है.
और....
आ गया क्रिसमस का महीना
आ गई गुरु घासी दास की जयंती
पीछे लगा हुआ है
अंग्रेजी नव वर्ष
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पहले ही दिन मां नहाने गयीं। उनके खुद के और उनके बांके बिहारी के स्नान में ही सारे पानी का काम तमाम हो गया। बाकी सारे परिवार को गीले कपडे से मुंह-हाथ पोंछ कर रह जाना पडा। माँ तो गांव से आई है। जीवन में बहुत से उतार-चढाव देखे हैं पर पानी की तंगी !!! यह कैसी जगह है ! यह कैसा शहर है ! जहां लोगों को पानी जैसी चीज नहीं मिलती। जब उन्हें बताया गया कि यहां पानी बिकता है तो उनकी आंखें इतनी बड़ी-बड़ी हो गयीं कि उनमें पानी आ गया।
बाज इंद्र बन और कबूतर अग्निदेव बन हुए प्रकट।
हाथ जोड़कर राजा शिवि से बोले होकर नतमस्तक।
हमने तो आपकी धर्म-परीक्षा हेतु यह रुप बनाया।
बहुत सुना था आज है देखा,आप हैं कितने न्यायी।
कटे अंग को पुनः जोड़,आशीष दिये वे धर्मी नरेश को।
अति पुरातन सत्य-कथा राजा शिवि और कपोत की
दो पैसे कमा,
अपने कर्तव्यों से विमुख
माता पिता को उनके कर्तव्यों का
ज्ञान देते हो …..
उनके सुख दुख से अनजान
जरूरतों को दरकिनार कर
घर के चौकीदार बना
स्वयं के आनंद में डूबे
अपनी संगिनी की
भावनाओं से आद्रित
मान-मनुहार करते
अपने माता - पिता के मान को
खंडित करते हो
कैसी संतान हो ???
सबक़ मिला है अधूरेपन का नदी के
दो किनारों से ...
यार कोई आईंना लाओं,
देखना है कितना संभला हूँ मैं।।
*****
बस

