शीर्षक पंक्ति:आदरणीया साधना वैद जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
गुरुवारीय अंक में प्रस्तुत हैं पाँच
पसंदीदा रचनाएँ-
खेल
कैसा है रचाया
अश्रु
हर क्योंकर बहाया,
नयन
स्वयं को देखते न
रहे
उनमें जग समाया!
ऐसा क्यों ? कारण सुनो,
दुख इतना हावी हो जाता,
सुख धूमिल हो
आँसुओं में बह जाता ।
गज़ब था बुढापा
अजब थी जवानी
वो थी शाहजादी
बला की दीवानी
भाया था उसको
एक बूढा अमानी
कसौली की खुशबू ने थाम लिया था...