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रविवार, 9 जुलाई 2023

3813 ...हो सके सच कभी भी बताया करो

 सादर नमस्कार

जुलाई मास का आठवां दिन
सुना है कि इस बार
आठ श्रावण सोमवार है
खैर जो भी हो बेहतर ही होगा
रचनाएँ देखे ....



नित रिक्त हों हरसिंगार सम
पुनः-पुनः मंगल ज्योति झरे,
रुकी ऊर्जा बन पाहन सी  
सर्जन नहीं  विनाश ही करे !





समय की देह पर पड़े निशान
सदियों से देख रही हूँ मैं
मानव की मौन प्रक्रिया
घट रही घटनाओं की
साक्षी रही हूँ मैं
पानी पहचानता है अपने तत्त्व को।

मनुज करता याचना ..
याचना प्रभु चरणों में
विश्वास और संबल बनती ..
मनुज की मनुज से
स्वार्थ वश याचना
भीख ही कहलाती
और दुर्बल बना जाती ।

गुनगुनाती रही रात भर बन गज़ल।
साथ तुम भी कभी गुनगुनाया करो।।

मुस्कराती रही बेबसी रात भर ।
हो सके सच कभी भी बताया करो ।।


ठोकर लगाएंगे तो मुझे टूटना ही है,
पानी का बुलबुला जो बताया गया हूँ मैं.

धोखा नज़र का हूँ के हक़ीक़त है हैसियत,
इक आईने के सामने लाया गया हूँ में.

आज के लिए बस
सादर
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