शीर्षक पंक्ति: आदरणीया डॉ.(सुश्री) शरद सिंह जी की रचना से।
अभिवादन।
मंगलवारीय अंक में पाँच रचनाओं के लिंक्स के साथ हाज़िर हूँ।
आइए पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ-
विश्व पर्यावरण दिवस | शायरी | खो गया वो
घाट | डॉ (सुश्री) शरद
सिंह
कट गया जंगल कि जिसमें घूमती थी एक हिरणी
पंछियों के साथ उसने प्रिय हिरण के स्वर सुने थे।
वो नदी, झरना, वो पोखर, सूख कर रेतिल हुए हैं
कौमुदी और शंख, सीपी भी वहीं जा कर चुने थे।
विश्व पर्यावरण दिवस पर शुभकामनाएँ
मरुथल
मरुथल पेड़ लगायें
हरे भरे वन
जंगल पाएँ,
बादल पंछी
मृग शावक सब
कुदरत
देख-देख हर्षाये!
हृदय स्पंदन बनाम पर्यावरण दिवस...
चलते-चलते पढ़िए एक रोचक लघुकथा जो चित्रित करती है कि हमारा बीता समय ऐसा भी था...
आग्नेयगिरि पर गौरेया (डायरी शैली)
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फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव